नयी दिल्ली, 16 नवंबर सरस मेला पहल ने ग्रामीण महिलाओं और उनके स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाने में एक लंबा सफर तय किया है और यह दो करोड़ ‘लखपति दीदी’ बनाने के लक्ष्य को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
यहां भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में ग्रामीण हस्तशिल्प को प्रदर्शित करने वाले मेले का औपचारिक उद्घाटन करते हुए ग्रामीण विकास सचिव शैलेश कुमार सिंह ने कहा, ‘‘यह सरस मेले का 25वां वर्ष है। मुझे उम्मीद है कि हम यहां कम से कम 10 करोड़ रुपये के उत्पाद बेचेंगे।’’
सरस मेले दो करोड़ ‘लखपति दीदी’ बनाने के लक्ष्य को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जो ग्रामीण महिलाओं को एक वर्ष में कम से कम एक लाख रुपये कमाने का लक्ष्य हासिल करने में मदद करने के लिए कौशल प्रदान करने की केंद्र सरकार की योजना है।
सिंह ने देशभर से आईं महिला प्रतिभागियों को बधाई दी और कहा कि उनकी कड़ी मेहनत के कारण ही सरस ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है।
यह मेला ग्रामीण कारीगरों को बिचौलियों के बिना अपने उत्पादों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने में मदद करता है, जिससे उनकी कड़ी मेहनत के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित होता है।
राष्ट्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज संस्थान के सहयोग से ग्रामीण विकास मंत्रालय पिछले 25 वर्षों से सरस मेलों का आयोजन कर रहा है, जिससे लाखों ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के अवसर और विपणन कौशल का लाभ मिल रहा है।
मंत्रालय के अनुसार, इस वर्ष लगभग 165 स्टॉल लगाए गए हैं जिनमें 28 राज्यों से 330 से अधिक महिलाएं भाग ले रही हैं। मेले में भाग लेने वाली महिलाओं की सुविधा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण शुरू किया गया है।
27 नवंबर तक चलने वाले इस मेले में 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के उत्पाद शामिल हैं, जिनमें गुजरात की पटोला साड़ियां, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के ऊनी उत्पाद, कर्नाटक और तेलंगाना के जैविक खाद्य उत्पाद और लकड़ी के उत्पाद एवं झारखंड के पलाश उत्पाद शामिल हैं।
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