विदेश की खबरें | यूक्रेन युद्ध के लिए सैनिकों की भर्ती करने को लेकर संघर्ष कर रहा है रूस
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. एक महिला ने बताया कि कुछ दिन बाद करीब एक दर्जन कैदी जेल से चले गए। इस महिला का प्रेमी उस जेल में बंद था। नाम न छापने की शर्त पर महिला ने बताया कि उसका प्रेमी उन स्वयंसेवियों में शामिल नहीं था, हालांकि अभी उसकी कई साल की सज़ा अभी बाकी है।
एक महिला ने बताया कि कुछ दिन बाद करीब एक दर्जन कैदी जेल से चले गए। इस महिला का प्रेमी उस जेल में बंद था। नाम न छापने की शर्त पर महिला ने बताया कि उसका प्रेमी उन स्वयंसेवियों में शामिल नहीं था, हालांकि अभी उसकी कई साल की सज़ा अभी बाकी है।
यूक्रेन में लड़ाई में रूस को लगातार नुकसान होने के बीच सैनिकों की भर्ती के प्रयासों को छुपाया जा रहा है और सैनिकों की कमी को पूरा करने के लिए कैदियों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया जा रहा है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब इस तरह की खबरें हैं कि रूसी सैनिक लड़ने से इनकार कर रहे हैं और सेना छोड़ने की कोशिश में हैं।
विधि सहायता समूह ‘कॉन्स्क्रिप्ट्स स्कूल’ का संचालन करने वाले वकील एलेक्सी ताबलोव ने कहा कि वे देख रहे हैं कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो युद्ध क्षेत्र छोड़ना चाहते हैं और इनमें वे भी शामिल हैं जो लंबे वक्त से युद्ध क्षेत्र में हैं और जिन्होंने हाल में अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं।
‘एसोसिएटेड प्रेस’ (एपी) को दिए साक्षात्कार में ताबलोव ने कहा कि समूह को बड़ी संख्य में ऐसे व्यक्तियों से आवेदन मिल रहे हैं जो अपना अनुबंध खत्म कराना चाहते हैं और “ मुझे निजी तौर पर लगता है कि कई लोग भागने को भी तैयार हैं।”
उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय उन लोगों को खोज रहा है जिन्हें वह सेवा के लिए राजी कर सकता है।
ताबलोव ने कहा कि सैनिक अपने अनुबंध को खत्म कर सकते हैं और इसकी स्वीकृति उन्हें उनके कमांडर देंगे। उन्होंने कहा कि युद्ध की स्थिति में कोई भी कमांडर ऐसी कोई मंजूरी नहीं देगा क्योंकि अगर वे ऐसा करेंगे तो जंग के लिए सैनिकों की कमी हो सकती है।
क्षेत्रीय प्रशासन ‘स्वयंसेवक बटालियन’ बना रहे हैं जिसका प्रचार सरकारी टीवी पर किया गया है। एपी ने नौकरी संबंधी वेबसाइट पर विभिन्न सैन्य विशेषज्ञों के लिए हजारों नौकरियां देखी हैं।
हालांकि रूस के रक्षा मंत्रालय ने सैनिकों को जुटाने की किसी भी गतिविधि से इनकार किया है।
ब्रिटिश सेना ने इस हफ्ते कहा था कि रूस ने ‘स्वयंसेवक बटालियन’ से एक अहम जमीनी बल गठित किया है जिसे तृतीय सेना कोर नाम दिया गया है।
हालांकि युद्ध शुरु होने पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने भी जेल में बंद पूर्व सैनिकों से वादा किया था कि अगर वे युद्ध में लड़ेंगे तो उन्हें क्षमा दान दिया जाएगा।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 11, 2022 04:11 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

