देश की खबरें | सेवानिवृत्त वन अधिकारियों ने प्रधानमंत्री मोदी से अरावली में सफारी परियोजना रद्द करने का आग्रह किया

नयी दिल्ली, 10 फरवरी सेवानिवृत्त वन अधिकारियों के एक समूह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर हरियाणा के अरावली में 10,000 एकड़ में फैली सफारी परियोजना को तत्काल रद्द करने की मांग की है।

अपने पत्र में पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षकों सहित भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के 37 सेवानिवृत्त अधिकारियों ने तर्क दिया कि परियोजना का ध्यान वन्यजीव संरक्षण के बजाय पर्यटन को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।

उन्होंने खनन, उत्खनन, रियल एस्टेट विकास और वनों की कटाई के कारण भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला के "खतरनाक विनाश" पर भी प्रकाश डाला।

सेवानिवृत्त वन अधिकारियों ने बताया कि गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली के पास तक फैली अरावली पर्वतमाला में मानवीय गतिविधियों के कारण वन्यजीवों के आवास नष्ट हो गए हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति पैदा हुई है और कई क्षेत्रों में भूजल स्तर में भारी कमी आई है।

उन्होंने कहा कि परियोजना का लक्ष्य हरियाणा में पर्यटकों की संख्या बढ़ाना तथा पर्यटन क्षेत्र में सरकारी और निजी निवेश आकर्षित करना है।

उनके पत्र में लिखा है, “अरावली का संरक्षण लक्ष्य नहीं है।”

पूर्व अधिकारियों ने चेतावनी दी कि पारिस्थितिकी दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही और निर्माण कार्य में वृद्धि के अलावा, यह परियोजना जलभृतों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। जलभृत पानी की कमी से जूझ रहे गुरुग्राम और नूंह जिलों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने कहा, “जलभृत आपस में जुड़े हुए हैं, तथा इनके स्वरूप में कोई भी गड़बड़ी या परिवर्तन भूजल पर अहम असर डाल सकता है।”

जलभृत चट्टान और/या तलछट का एक पिंड है जो भूजल को धारण करता है।

केन्द्रीय भूजल बोर्ड पहले ही कह चुका है कि गुरुग्राम और नूंह में भूजल को जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किया गया है।

हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अप्रैल 2022 में सफारी परियोजना की घोषणा की थी जो गुरुग्राम और नूंह जिलों में अरावली की 10,000 एकड़ भूमि पर फैली हुई है। यह 2024 के हरियाणा चुनावों के लिए भाजपा के चुनावी वादों में भी शामिल थी।

कुछ वर्ष पहले हरियाणा वन विभाग द्वारा किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, अरावली में पक्षियों की 180 प्रजातियां, स्तनपायी की 15 प्रजातियां, तितली की 57 प्रजातियां और कई सरीसृप प्रजातियां पाई जाती हैं।

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