जरुरी जानकारी | ‘डिजिटल’ के दौर में चेक से खुदरा भुगतान घटकर 2.96 प्रतिशत पर आया : अरबीआई
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. डिजिटल भुगतान और समाधान प्रणाली को तेजी से आगे बढ़ाने के सकारात्मक नतीजे सामने आने लगे है। भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन की वजह से बीते वित्त वर्ष 2019-20 में चेक के जरिये खुदरा भुगतान का आंकड़ा काफी नीचे आ गया है।
मुंबई, 18 अक्टूबर डिजिटल भुगतान और समाधान प्रणाली को तेजी से आगे बढ़ाने के सकारात्मक नतीजे सामने आने लगे है। भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन की वजह से बीते वित्त वर्ष 2019-20 में चेक के जरिये खुदरा भुगतान का आंकड़ा काफी नीचे आ गया है।
आंकड़ों के अनुसार, बीते वित्त वर्ष में मात्रा के हिसाब से कुल खुद भुगतान में चेक समाशोधन (क्लियरिंग) का हिस्सा घटकर मात्र 2.96 प्रतिशत रह गया। हालांकि, मूल्य के हिसाब से यह 20.08 प्रतिशत रहा।
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वित्त वर्ष 2015-16 में नोटबंदी के बाद केंद्रीय बैंक ने डिजिटल भुगतान को काफी तेजी से आगे बढ़ाना शुरू किया था। उस समय खुदरा भुगतान में मात्रा के हिसाब से चेक का हिस्सा 15.81 प्रतिशत और मूल्य के हिसाब से 46.08 प्रतिशत था।
डिजिटलीकरण के प्रयास कितने सफल रहे हैं, इसका अनुमान ताजा आंकड़ों से लगता है। 2015-16 में चेक के जरिये भुगतान का मात्रा के हिसाब से 15.81 प्रतिशत और मूल्य के हिसाब से 46.08 प्रतिशत हिस्सा था। वित्त वर्ष 2016-17 में यह आंकड़ा घटकर क्रमश: 11.18 प्रतिशत और 36.79 प्रतिशत पर आ गया।
रिजर्व बैंक के अनुसार अगले साल यह आंकड़ा और घटकर मूल्य के हिसाब से 7.49 प्रतिशत और मात्रा के हिसाब से 28.78 प्रतिशत पर आ गया। वहीं 2018-19 में यह और घटकर क्रमश 4.60 प्रतिशत और 22.65 प्रतिशत पर आ गया।
रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2015-16 से 2019-20 के दौरान मात्रा के हिसाब से डिजिटल भुगतान सालाना आधार पर 55.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 593.61 करोड़ से 3,434.56 करोड़ पर पहुंच गया। वहीं मूल्य के हिसाब से यह 920.38 लाख करोड़ रुपये से 1,623.05 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इसमें सालाना आधार पर 15.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।
वित्त वर्ष 2016-17 में डिजिटल भुगातन 593.61 करोड़ से 969.12 करोड़ पर पहुंच गया। मूल्य के हिसाब से यह इस दौरान 1,120.99 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
इसके बाद 2017-18 में यह मात्रा के हिसाब से 1,459.01 करोड़ पर और मूल्य हिसाब से 1,369.86 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। बाद में इसमें और तेज वृद्धि हुई और 2018-19 में यह मात्रा के हिसाब से 2,343.40 करोड़ और मात्रा के हिसाब से 1,638.52 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
कोविड-19 महामारी की वजह से लागू लॉकडाउन के चलते मात्रा के हिसाब से आगे डिजिटल भुगतान का आंकड़ा कई गुना बढ़ सकता है। हालांकि, इस बड़े संकट की वजह से लोगों के समक्ष आई दिक्कतों के चलते मूल्य के हिसाब से डिजिटल भुगतान का आंकड़ा नीचे आ सकता है।
अजय
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(The above story first appeared on LatestLY on Oct 18, 2020 04:41 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

