Durga Puja 2026 Wishes: दुर्गा पूजा के इन भक्तिमय हिंदी Quotes, WhatsApp Messages, Facebook Greetings के जरिए दें अपनों को शुभकामनाएं
शारदीय नवरात्रि के छठे दिन से पांच दिवसीय दुर्गा पूजा का मुख्य पर्व आरंभ होता है. 16 अक्टूबर को 'बिल्व निमंत्रण' और 'बोधन' अनुष्ठान के जरिए मां दुर्गा के मुख का अनावरण किया जाएगा. इस पावन अवसर पर श्रद्धालु अपने परिजनों और मित्रों को सोशल मीडिया पर भक्तिमय संदेशों और शुभकामनाओं के माध्यम से 'शुभ दुर्गा पूजा' की बधाई प्रेषित कर रहे हैं.
Durga Puja 2026 Wishes in Hindi: शक्ति साधना, कला और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक दुर्गा पूजा (Durgotsav 2026) इस वर्ष 16 अक्टूबर (शुक्रवार) को महा षष्ठी तिथि के साथ अपने मुख्य पर्व के रूप में प्रारंभ होगा. हालांकि दुर्गा पूजा की आध्यात्मिक तैयारी महालया और नवरात्रि की प्रतिपदा से ही शुरू हो जाती है, लेकिन पंडालों में पांच दिवसीय भव्य सार्वजनिक उत्सव का औपचारिक शुभारंभ षष्ठी तिथि से ही माना जाता है.
आश्विन शुक्ल षष्ठी से दशमी तक चलने वाला यह उत्सव 20 अक्टूबर को विजयादशमी के दिन मां दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन और सिंदूर खेला के साथ संपन्न होगा. पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, असम सहित देश-विदेश के कोने-कोने में आकर्षक थीम वाले पूजा पंडाल सजकर तैयार हो चुके हैं.
प्रियजनों के साथ साझा करें दुर्गा पूजा के ये लोकप्रिय हिंदी संदेश
दुर्गा पूजा के पावन अवसर पर अपने मित्रों, संबंधियों और परिजनों को सोशल मीडिया व मैसेजिंग ऐप्स के जरिए इन भक्तिमय संदेशों से शुभकामनाएं दे सकते हैं:





- "ढाक की थाप, काश के फूल और शंख की गूंज; मां दुर्गा के आगमन से आपके जीवन में आए सुख, शांति और समृद्धि की नई किरण। शुभ दुर्गा पूजा 2026!"
- "सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥ मां दुर्गा का आशीर्वाद आपके परिवार पर सदैव बना रहे। हैप्पी दुर्गा पूजा!"
- "बुराई पर अच्छाई की विजय का यह पावन पर्व आपके जीवन से समस्त नकारात्मकता को दूर करे और खुशियों का उजाला फैलाए। आपको और आपके पूरे परिवार को दुर्गा पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं!"
- "सिंदूर का लाल रंग और मां का जगमग दरबार; आपके आंगन में बरसे खुशियों और सफलता का उपहार। जय मां दुर्गा! शुभो दुर्गोत्सव 2026!"
महा षष्ठी पर 'बोधन' और मां के मुख का अनावरण
दुर्गा पूजा के पहले दिन यानी महा षष्ठी का धार्मिक विधान अत्यंत महत्वपूर्ण होता है:
- अकाल बोधन: पौराणिक मान्यता के अनुसार, त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने लंका विजय से पूर्व आश्विन मास में देवी का असामयिक आह्वान (अकाल बोधन) किया था. इसी परंपरा के तहत षष्ठी के दिन शाम को बेल के वृक्ष के नीचे 'बिल्व निमंत्रण' और 'बोधन' अनुष्ठान संपन्न किया जाता है.
- प्रतिमा अनावरण: बोधन के बाद ढाक की पारंपरिक ताल और शंख की मंगलध्वनि के बीच मां दुर्गा की प्रतिमा के चेहरे से पर्दा हटाया जाता है (अनावरण)। इसके साथ ही दर्शनार्थियों के लिए पंडालों के पट पूरी तरह खोल दिए जाते हैं.
- नवरात्रि का छठा स्वरूप: नवरात्रि के क्रम में षष्ठी तिथि नवदुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की उपासना का दिन होता है, जिन्होंने महिषासुर के वध के लिए महर्षि कात्यायन के आश्रम में अवतार लिया था.
महालया से शुरू हुई यात्रा, विजयादशमी पर विदाई
दुर्गा पूजा का संपूर्ण क्रम आध्यात्मिक और पारंपरिक चरणों में बंधा हुआ है:
- महालया पर चक्षुदान: महालया के दिन ही मूर्तिकारों द्वारा देवी की प्रतिमाओं की आंखें खींचने (चक्षुदान) के साथ देवी पक्ष की शुरुआत हुई थी.
- सप्तमी से नवमी: महा सप्तमी पर नवपत्रिका प्रवेश (कोलाबाउ स्नान), महा अष्टमी पर कुमारी पूजन व संधि पूजा, और महा नवमी पर विशेष हवन तथा महाआरती का आयोजन होगा.
- विजयादशमी और सिंदूर खेला (20 अक्टूबर): उत्सव के अंतिम दिन विवाहित महिलाएं मां दुर्गा को पान और सिंदूर अर्पित कर आपस में 'सिंदूर खेला' खेलती हैं और नम आंखों से मां को विदाई देकर उनके अगले वर्ष पुनः आगमन की प्रार्थना करती हैं.
(The above story first appeared on LatestLY on Oct 15, 2026 04:00 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

