त्योहार

Sharad Navratri 2026 Sanskrit Wishes: नवरात्रस्य शुभकामना! अपनों को भेजें ये संस्कृत Shlokas, WhatsApp Messages, GIF Greetings और Photo SMS

वर्ष में पड़ने वाली चार नवरात्रियों में शारदीय नवरात्रि का महत्व सर्वाधिक माना जाता है. श्रद्धालु नौ दिनों तक उपवास रखकर 'दुर्गा सप्तशती' और 'दुर्गा चालीसा' का पाठ करते हैं. इस पावन अवसर पर मातारानी के स्वागत और भक्तिमय माहौल के बीच लोग एक-दूसरे को पारंपरिक संस्कृत श्लोकों और आध्यात्मिक शुभकामनाओं के जरिए बधाई प्रेषित कर रहे हैं.

Sharad Navratri 2026 Sanskrit Wishes: नवरात्रस्य शुभकामना! अपनों को भेजें ये संस्कृत Shlokas, WhatsApp Messages, GIF Greetings और Photo SMS
शारदीय नवरात्रि 2026 (Photo Credits: File Image)

नई दिल्ली: शक्ति, संयम और साधना का पावन पर्व शारदीय नवरात्रि इस वर्ष 11 अक्टूबर 2026 से आरंभ हो रहा है. हिंदू धर्म में वर्ष भर में कुल चार बार नवरात्रि का आयोजन होता है—जिनमें चैत्र और आश्विन (शारदीय) मास की नवरात्रियां प्रत्यक्ष रूप से जन-जन द्वारा उल्लास के साथ मनाई जाती हैं, जबकि माघ और आषाढ़ मास में गुप्त नवरात्रि का विधान है.

सर्वपितृ अमावस्या यानी महालया के दिन पितरों की विदाई और मां दुर्गा के कैलाश पर्वत से पृथ्वी पर आगमन के बाद, आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से देवी के नौ स्वरूपों की आराधना का महापर्व शुरू हो जाता है. इसका समापन 20 अक्टूबर को बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक विजयादशमी के साथ होगा.

प्रियजनों को भेजें शारदीय नवरात्रि के ये पावन संस्कृत श्लोक और शुभकामनाएं

शारदीय नवरात्रि के इस आध्यात्मिक पर्व पर मित्रों, संबंधियों और परिजनों को वेदों व पुराणों से उद्धृत इन संस्कृत श्लोकों (अर्थ सहित) के माध्यम से शुभकामनाएं दी जा रही हैं:

1- सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि।
गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तु ते।।
भावार्थ: हे सृजन, अस्तित्व और विनाश की शाश्वत शक्ति! हे नारायणी, प्रकृति के गुणों की आश्रय और प्रकृति के गुणों से परिपूर्ण, मैं आपको नमस्कार करता हूं.

शारदीय नवरात्रि 2026 (Photo Credits: File Image)

2- न तातो न माता न बन्धुर्न दाता
न पुत्रो न पुत्री न भृत्यो न भर्ता।
न जाया न विद्या न वृत्तिर्ममैव
गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि।।
भावार्थ: न पिता, न माता, न मित्र, न दाता, न बेटा, न बेटी, न नौकर, न पति, न पत्नी, न ज्ञान, न व्यवसाय, भवानी आप ही मेरा मार्ग हैं, आप ही पथ हैं और सबकुछ आप ही हैं.

शारदीय नवरात्रि 2026 (Photo Credits: File Image)

3- नमस्ते परमेशानि ब्रह्यरूपे सनातनी।
सुरासुरजगद्वन्द्ये कामेश्वरि नमोऽस्तु ते।।
भावार्थ: हे ब्रह्मरूपी, शाश्वत स्वरूप परम देवी, आपको नमस्कार है. हे देवताओं और राक्षसों की दुनिया द्वारा पूजी जाने वाली इच्छाओं की देवी, मैं आपको नमस्कार करता हूं.

शारदीय नवरात्रि 2026 (Photo Credits: File Image)

4- नमो देव्यै प्रकृत्यै च विधात्र्यै सततं नमः।
कल्याण्यै कामदायै च वृद्धयै सिद्धयै नमो नमः।।
भावार्थ: देवी प्रकृति और निर्माता को सदैव प्रणाम. शुभता, कल्याण, कामना पूर्ति, वृद्धि एवं पूर्णता हेतु आपको नमस्कार है.

शारदीय नवरात्रि 2026 (Photo Credits: File Image)

5- सर्वस्य बुद्धिरूपेण जनस्य हृदि संस्थिते।
स्वर्गापवर्गदे देवी नारायणि नमोऽस्तु ते।।
भावार्थ: देवी नारायणी, जो सभी लोगों में बुद्धि रूप में विराजमान हैं, जो स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करती हैं, उन नारायणी देवी को मैं नमस्कार करता हूं.

शारदीय नवरात्रि 2026 (Photo Credits: File Image)

  • श्लोक:

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।

शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

अर्थ: हे सर्वमंगल का विधान करने वाली, कल्याणमयी, समस्त पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली, शरणागतवत्सला, तीन नेत्रों वाली शिवा गौरी नारायणी, आपको बारंबार नमन है।

शारदीय नवरात्रस्य हार्दिकाः शुभाशयाः!

  • श्लोक:

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

अर्थ: जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति के रूप में विराजमान हैं, उनको मेरा बारंबार नमस्कार है।

शुभ शारदीय नवरात्रि 2026!

  • श्लोक:

दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः

स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।

दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या

सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता॥

अर्थ: हे मां दुर्गे! संकट के समय स्मरण करने पर आप समस्त जीवों का भय हर लेती हैं और स्वस्थ चित्त से स्मरण करने पर परम शुभ बुद्धि प्रदान करती हैं। आपके अतिरिक्त दुख और दरिद्रता का नाश करने वाला और कौन है?

नवरात्रपर्वणः सर्वेभ्यः हार्दिक्यः शुभकामनाः!

  • श्लोक:

देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोऽखिलस्य।

प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य॥

अर्थ: हे शरणागत का दुख दूर करने वाली देवी, प्रसन्न होइए। हे संपूर्ण जगत की माता, कृपा कीजिए। हे विश्वेश्वरी, इस विश्व की रक्षा करें, आप ही समस्त चराचर की स्वामिनी हैं।

नवरात्रस्य मंगलमयाः शुभाशयाः!

शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना और अखंड ज्योति का महत्व

शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में घटस्थापना (कलश स्थापना) करना अनिवार्य माना गया है:

  • देवी का वास: धार्मिक मान्यता है कि विधिवत स्थापित कलश में नौ दिनों तक समस्त तीर्थों, देवी-देवताओं और स्वयं मां जगदंबा का वास रहता है.
  • अखंड ज्योति और नियम: पहले दिन से ही कई श्रद्धालु नौ दिनों तक अनवरत जलने वाली अखंड ज्योति प्रज्वलित करते हैं तथा नियमित रूप से 'दुर्गा सप्तशती' और 'दुर्गा चालीसा' का पारायण करते हैं.

नौ दिनों में मां नवदुर्गा के इन स्वरूपों की होगी पूजा

प्रतिपदा से लेकर नवमी तिथि तक मां दुर्गा के नौ अलग-अलग दिव्य रूपों की क्रमवार उपासना की जाती है:

  1. प्रतिपदा (11 अक्टूबर): मां शैलपुत्री (कलश स्थापना)
  2. द्वितीया: मां ब्रह्मचारिणी
  3. तृतीया: मां चंद्रघंटा
  4. चतुर्थी: मां कुष्मांडा
  5. पंचमी: मां स्कंदमाता
  6. षष्ठी: मां कात्यायनी
  7. सप्तमी: मां कालरात्रि
  8. अष्टमी: मां महागौरी (महाष्टमी व्रत व पूजा)
  9. नवमी: मां सिद्धिदात्री (महानवमी, हवन व कन्या पूजन)

धार्मिक मान्यता है कि मां के इन नौ रूपों की निष्ठापूर्वक पूजा करने से व्यक्ति के समस्त कष्टों का निवारण होता है और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि का वास होता है.

(The above story first appeared on LatestLY on Oct 10, 2026 07:00 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).