मुंबई, 10 अगस्त भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे ने बृहस्पतिवार को बैंकों से ऋण वसूली के प्रयासों को दोगुना करने को कहा। उन्होंने कर्ज को बट्टे खाते में डालने से होने वाले नुकसान को सीमित करने के लिए कहा, जिससे उन्हें अधिक मुनाफा कमाने में मदद मिलेगी।
हाल में केंद्रीय बैंक से जुड़े स्वामीनाथन ने कहा कि कर्ज को बट्टे खाते में डालने से बैंक की वसूली करने की क्षमता या उधारकर्ता की बकाया चुकाने की क्षमता कम नहीं होती है, और वसूली से बैंक को अधिक मुनाफा कमाने में मदद मिल सकती है।
सरकार ने इस सप्ताह की शुरुआत में संसद को बताया था कि बैंकों ने वित्त वर्ष 2014-15 से 14.56 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज बट्टे खाते में डाला है।
स्वामीनाथन ने यहां केंद्रीय बैंक के मुख्यालय में संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम चाहेंगे कि बैंक ऋण वसूली के अपने प्रयासों को दोगुना करें। इन्हें विशेष खातों में रखा गया है और हम चाहेंगे कि इनसे अधिक वसूली हो।’’
उन्होंने कहा कि ऐसे गैर-निष्पादित आस्ति (एनपीए) खाते जो 4-5 साल से अधिक पुराने हैं, उनमें वसूली की संभावना कम होती है। इसलिए एनपीए कितना पुराना है और उसमें अंतरनिर्हित मूल्य पर भी विचार होना चाहिए।
स्वामीनाथन ने कहा कि बैंक फंसे हुए कर्ज के लिए प्रावधान करते हैं और बट्टे खाते में डालते समय प्रावधान किसी खाते में बकाया के बराबर होना चाहिए।
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