देश की खबरें | अनुसंधानकर्ताओं ने ऊर्जा अभाव को समाप्त करने के लिए ‘मिशन एनर्जी एक्सेस’ का प्रस्ताव रखा

नयी दिल्ली, छह नवंबर दुनिया भर के अनुसंधानकर्ताओं की एक टीम ने 2030 तक ऊर्जा अभाव को समाप्त करने के वैश्विक लक्ष्य का समर्थन करने के लिए एक नए कार्यक्रम ‘मिशन एनर्जी एक्सेस’ का प्रस्ताव रखा है।

टीम में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली; अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी पेरिस; यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन; सस्टेनेबल एनर्जी फॉर ऑल; वियना और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के अनुसंधानकर्ता शामिल हैं।

पत्रिका ‘नेचर एनर्जी’ में प्रकाशित ‘सभी के लिए न्यायसंगत और सतत भविष्य की खातिर मिशन ऊर्जा पहुंच’ शीर्षक वाले शोधपत्र में लेखकों ने कहा कि ऊर्जा पहुंच बढ़ाने के प्रयासों के बावजूद, 2021 में दुनिया भर में लगभग 67.5 करोड़ लोग ऐसे थे जिनके यहां बिजली नहीं थी और लगभग 2.3 अरब लोगों के पास स्वच्छ भोजन पकाने की सुविधाएं नहीं थीं।

स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी, आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर अंबुज सागर ने कहा, "2030 तक सार्वभौमिक ऊर्जा पहुंच सुनिश्चित करने की आकांक्षा और इस लक्ष्य को पूरा करने के प्रयासों के बीच लगातार अंतर को देखते हुए, ऊर्जा पहुंच बढ़ाने के वास्ते एक ‘मिशन-मोड’ दृष्टिकोण की तत्काल आवश्यकता है।"

सागर ने कहा कि स्वच्छ और आधुनिक ऊर्जा जैसे अभिनव एवं किफायती समाधानों के विकास को बढ़ाकर ऐसा मिशन ऊर्जा पहुंच बढ़ाने में तिगुना लाभ प्रदान करने, सामाजिक एवं आर्थिक लाभ तथा जलवायु लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।

अनुसंधानकर्ताओं ने उल्लेख किया है कि अतिरिक्त प्रयासों और उपायों के अभाव में, कम से कम 66 करोड़ लोग (ज्यादातर कम विकसित देशों और उप-सहारा अफ्रीका में) बिजली तक पहुंच से वंचित रहेंगे और 1.9 अरब लोग 2030 में खाना पकाने के लिए प्रदूषणकारी ईंधन और प्रौद्योगिकियों (ज्यादातर पारंपरिक स्टोव में उपयोग किए जाने वाले जैव ईंधन) पर निर्भर रहेंगे।

लेखकों ने इसे 2030 तक ऊर्जा अभाव को समाप्त करने की वैश्विक प्रतिबद्धता के साथ विश्वासघात करार दिया और कहा कि 2030 तक सार्वभौमिक ऊर्जा पहुंच सुनिश्चित करने के प्रयासों में तेजी लाने के लिए ‘मिशन एनर्जी एक्सेस’ कार्यक्रम की तत्काल आवश्यकता है।

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