देश की खबरें | आईआईटी दिल्ली के अनुंसधानकर्ताओं ने भूमि का कटाव होने वाले संभावित क्षेत्रों का मानचित्र तैयार किया

नयी दिल्ली, 20 जुलाई भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), दिल्ली के अनुसंधानकर्ताओं ने बारिश के चलते भूमि का कटाव होने वाले संभावित क्षेत्रों को रेखांकित करने के लिए एक अखिल भारतीय मानचित्र तैयार किया है।

अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक, मेघालय राज्य के ईस्ट खासी हिल्स के लैतकिनसेव और चेरापूंजी इलाकों को बारिश की वजह से भूमि का कटाव होने का सबसे अधिक खतरा है जबकि लद्दाख का शाही कांगड़ी पहाड़ी क्षेत्र में भूमि का कटाव होने का खतरा सबसे कम है।

अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक इस मानचित्र से भूमि के कटाव को न्यूनतम करने के लिए योजना बनाने, उन्हें लागू करने और कटाव को रोकने के लिए कदम उठाने में मदद मिलेगी।

अनुसंधान टीम ने कहा कि बारिश की वजह से होने वाले भूमि के कटाव को वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख पर्यावरण समस्या बताया गया है। टीम ने कहा कि मौजूदा समय में भारत में भूमि के कटाव का आकलन जल ग्रहण क्षेत्र या विशेष क्षेत्र तक सीमित है, जो भारत जैसे विशाल और जलवायु विविधता वाले देश में बारिश से होने वाले भूमि के कटाव का आकलन करने के लिए अपर्याप्त है।

आईआईटी दिल्ली के सिविल इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर मानवेंद्र सहरिया ने बताया, ‘‘भारत में होने वाले भूमि के कटाव में 68.4 प्रतिशत हिस्से के लिए जल और बारिश जिम्मेदार हैं। बारिश से होने वाले भूमि के कटाव को वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख पर्यावरण समस्या के तौर पर चिह्नित किया गया है।’’

उन्होंने बताया कि विभिन्न राष्ट्रीय और वैश्विक डेटा के आधार पर यह मानचित्र तैयार किया गया है, ताकि भारत में भूमि के कटाव के संभावित क्षेत्रों को रेखांकित किया जा सके।

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