नयी दिल्ली, 18 दिसंबर ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रतिनिधियों ने वक्फ (संशोधन) विधेयक पर विचार कर रही संसद की संयुक्त समिति के समक्ष अपने विचार साझा किए।
सूत्रों ने बताया कि बोर्ड ने विधेयक के कई प्रावधानों का विरोध किया, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि इसके सदस्य विधेयक के विभिन्न पहलुओं पर अपनी राय देने और सांसदों के प्रश्नों का व्यापक रूप से जवाब देने के लिए तैयार नहीं थे।
समिति के अध्यक्ष और भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि समिति के सदस्यों ने कई मुद्दों पर बोर्ड के प्रतिनिधियों के विचार मांगे, और सदस्यों को बताया गया कि प्रतिनिधि बाद में एक विस्तृत संचार प्रस्तुत करेंगे।
उन्होंने कहा, "जरूरत पड़ने पर समिति उन्हें दोबारा भी बुला सकती है।"
लोकसभा ने गत 28 नवंबर को इस समिति का कार्यकाल बजट सत्र के आखिरी दिन तक के लिए बढ़ाने को मंजूरी दी थी। बजट सत्र अगले साल के शुरू में आयोजित होगा।
सरकार ने वक्फ बोर्ड को नियंत्रित करने वाले कानून में संशोधन से संबंधित विधेयक गत आठ अगस्त को लोकसभा में पेश किया था जिसे सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक एवं चर्चा के बाद संयुक्त समिति को भेजने का फैसला हुआ था।
इस विधेयक में वर्तमान अधिनियम में दूरगामी बदलावों का प्रस्ताव रखा गया है, जिनमें वक्फ निकायों में मुस्लिम महिलाओं और गैर-मुसलमानों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना भी शामिल है।
वक्फ (संशोधन) विधेयक में वक्फ अधिनियम, 1995 का नाम बदलकर ‘एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तीकरण, दक्षता और विकास अधिनियम, 1995’ करने का भी प्रावधान है।
विधेयक के उद्देश्यों और कारणों के विवरण के अनुसार, विधेयक में यह तय करने की बोर्ड की शक्तियों से संबंधित मौजूदा कानून की धारा 40 को हटाने का प्रावधान है कि कोई संपत्ति वक्फ संपत्ति है या नहीं।
यह संशोधन विधेयक केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्ड की व्यापक आधार वाली संरचना प्रदान करता है और ऐसे निकायों में मुस्लिम महिलाओं तथा गैर-मुसलमानों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करता है।
हक नोमान
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