जरुरी जानकारी | रेपो दर में कटौती से भविष्य में ब्याज दरों में और कटौती की गुंजाइश बनी : उद्योग निकाय

नयी दिल्ली, सात फरवरी भारतीय उद्योग जगत ने शुक्रवार को करीब पांच साल में पहली बार प्रमुख नीतिगत दर रेपो में कटौती करने के भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के कदम की सराहना करते हुए कहा है कि यह पिछले सप्ताह संसद में पेश बजट में घोषित उपभोग बढ़ाने वाले उपायों का पूरक होगा, तथा अर्थव्यवस्था को जरूरी समर्थन प्रदान करेगा।

उद्योग निकायों का मानना ​​है कि रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती कर इसे 6.25 प्रतिशत कर दिया जाना निकट भविष्य में ब्याज दरों में और ढील दिए जाने का आधार तैयार करता है। ब्याज दरों में कटौती इससे पहले मई, 2020 में की गई थी।

दरों में अंतिम संशोधन फरवरी, 2023 में हुआ था जब नीतिगत दर को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत किया गया था।

उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, “केंद्रीय बैंक द्वारा यह संतुलित दृष्टिकोण आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के बीच सतर्क संतुलन को दर्शाता है। उम्मीद है कि ब्याज दरों में कटौती से घरेलू मांग को बढ़ावा मिलेगा।”

उन्होंने कहा, “हमारा मानना ​​है कि मुद्रास्फीति की प्रवृत्ति में नरमी और गैर-मुद्रास्फीतिकारी राजकोषीय नीति ने आरबीआई को अपने दर कटौती चक्र को जारी रखने और वित्तीय स्थिति अनुकूल होने पर बड़ी दर कटौती लागू करने का मौका दिया है।”

फिक्की के अध्यक्ष हर्षवर्धन अग्रवाल ने रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती करने के आरबीआई के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम इस समय अर्थव्यवस्था को बहुत जरूरी समर्थन प्रदान करेगा।

उन्होंने नीतिगत दर में कटौती करने के आरबीआई के फैसले को समयोचित और दूरदर्शी कदम बताया तथा उम्मीद जताई कि बैंकिंग क्षेत्र इस संकेत का अनुसरण करेगा और ऋण की ब्याज दरों में कमी देखने को मिलेगी।

फिक्की के अध्यक्ष ने कहा कि बजट ने विनिर्माण, एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यम) और बुनियादी ढांचे पर जोर देते हुए निवेश आधारित वृद्धि के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है। ब्याज दरों में कटौती इन उपायों का पूरक है, जिससे भारत के वृद्धि परिदृश्य को और अधिक समर्थन मिलता है।

पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) के अध्यक्ष हेमंत जैन ने कहा कि रेपो दर में कमी से निवेश बढ़ेगा, उपभोक्ता खर्च और उत्पादन में वृद्धि होगी तथा समग्र अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी।

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