नयी दिल्ली, चार फरवरी जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने मंगलवार को कहा कि धर्म गुरुओं को पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने को पाप और प्रकृति की रक्षा को पुण्य का काम घोषित करना चाहिए।
‘सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट’ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में वांगचुक ने कहा कि शिक्षा पर पुनर्विचार करने की जरूरत है, क्योंकि वर्तमान प्रणाली लोगों को केवल अधिक उत्पादन और उपभोग करना सिखाती है, न कि टिकाऊ जीवन जीना।
इस कार्यक्रम में स्कूलों को उनके पर्यावरण अनुकूल कार्यों के लिए पुरस्कृत किया गया।
वांगचुक ने कहा, ‘‘आज की दुनिया में लोग चाकू या हथियारों से हिंसा नहीं करते, बल्कि प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाली असंवहनीय जीवनशैली के माध्यम से हिंसा करते हैं।’’
दिल्ली में वायु प्रदूषण के गंभीर स्तर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘लोगों को धीमा जहर दिया जा रहा है। जो लोग 90 साल तक जी सकते थे, वे बस वायु प्रदूषण के कारण 80 साल की उम्र में मर रहे हैं। क्या यह पाप नहीं है?’’
उन्होंने कहा, ‘‘बड़े लोग वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की तुलना में धर्म गुरुओं की बात अधिक सुनते हैं। धर्म गुरुओं को पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने को पाप और प्रकृति की रक्षा करने को पुण्य का काम घोषित करना चाहिए। हमें अपने मूल्यों को फिर से परिभाषित करने की जरूरत है।’’
वांगचुक ने प्रमुख प्रदूषकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का भी आह्वान किया, जिसमें गंभीर वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार लोगों के लिए जेल की सजा भी शामिल है।
उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर जीवन तभी संभव हुआ, जब लाखों वर्षों में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर कम हुआ और इसका श्रेय प्रकाश संश्लेषण को जाता है।
वांगचुक ने आगाह किया, ‘‘अब मनुष्य उस प्रक्रिया को उलट रहा है। वह कार्बन को वापस वायुमंडल में छोड़ रहा है। अगर हम इसी रास्ते पर चलते रहे, तो हम पृथ्वी को उस समय में वापस धकेल देंगे, जब जीवन असंभव था।’’
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