जरुरी जानकारी | रिलायंस एआरसी ने विदर्भ इंडस्ट्रीज की ‘स्विस चैलेंज’ प्रक्रिया को चुनौती दी

नयी दिल्ली, 10 अगस्त रिलायंस कैपिटल की अनुषंगी इकाई रिलायंस एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी (एआरसी) ने विदर्भ इंडस्ट्रीज पावर लिमिटेड (वीआईपीएल) के कर्ज की बिक्री के लिए आयोजित ‘स्विस चैलेंज’ बोली प्रक्रिया को चुनौती दी है।

सूत्रों के मुताबिक, रिलायंस एआरसी ने स्विस चैलेंज बोली प्रक्रिया पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के मास्टर सर्कुलर को भी भेदभावपूर्ण और मनमाना बताते हुए चुनौती दी है। कंपनी का कहना है कि इसमें प्रमुख बोली लगाने वाले एंकर बोलीदाता को अन्यायपूर्ण और अनुचित लाभ दिया गया है।

कंपनी ने बंबई उच्च न्यायालय में दायर एक रिट याचिका में कहा है कि आरबीआई के मास्टर डायरेक्शन (कर्ज का स्थानांतरण) का 85वां खंड एंकर बोलीदाता को स्विस चैलेंज प्रक्रिया में चुनौती देने वाले बोलीदाताओं की किसी भी बोली से मिलान करने का असीमित अधिकार देता है। यह प्रतिस्पर्धा को हतोत्साहित करता है और बैंकों और ऋणदाताओं के लिए अधिकतम मूल्य हासिल करने के सिद्धांत को नाकाम करता है।

मास्टर डायरेक्शन के खंड 85 के अनुसार, स्विस चैलेंज प्रक्रिया में एक बार जब किसी परिसंपत्ति पुनर्गठन कंपनी (एआरसी) ने एक दबावग्रस्त संपत्ति के लिए बोली लगाई है, तो उसे अपने-आप एंकर बोलीदाता का दर्जा मिल जाता है। इस एंकर बोलीदाता को स्विस चैलेंज प्रक्रिया के दौरान आई उच्चतम बोली से मेल खाने के लिए ‘पहले इनकार का असीमित अधिकार' (आरओएफआर) मिलता है।

रिलायंस एआरसी समेत तीन कंपनियों को विदर्भ इंडस्ट्रीज पावर के ऋण की बिक्री के लिए एसबीआई कैपिटल की तरफ से आयोजित स्विस चैलेंज प्रक्रिया में भाग लेने की मंजूरी मिली है। दो अन्य कंपनियां आदित्य बिड़ला एआरसी और एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी (इंडिया) लिमिटेड (आर्सिल) हैं।

वीआईपीएल के ऋणदाताओं ने अहमदाबाद स्थित सीएफएम एआरसी की तरफ से लगाई गई 1,220 करोड़ रुपये की बोली को एंकर बोली घोषित किया है।

सूत्रों के मुताबिक, रिलायंस एआरसी को आशंका है कि एंकर बोलीदाता होने से सीएफएम एआरसी को चुनौती देने वाले बोलीदाताओं से जवाबी बोलियों का मिलान करने का असीमित अधिकार होगा और वह आखिरकार विजेता बोलीकर्ता बनकर उभरेगी।

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