प्रयागराज, 21 मई इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला के खिलाफ वाराणसी की अदालत में लंबित आपराधिक मुकदमे को रद्द करने से मना कर दिया है।
हालांकि, उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि इस मामले में सुरजेवाला निचली अदालत के समक्ष आवेदन कर सकते हैं जिस पर छह सप्ताह के भीतर विचार कर निर्णय किया जाए।
उच्च न्यायालय ने यह निर्देश भी दिया कि दो महीने तक या आरोप मुक्त करने का आग्रह करने वाले आवेदन के निस्तारण तक कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
रणदीप सिंह सुरजेवाला द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 482 के तहत दायर आवेदन का सोमवार को निस्तारण करते हुए न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता ने कहा, “रिकॉर्ड पर लाई गई सामग्री और इस मामले के तथ्यों पर विचार करते हुए यह नहीं कहा जा सकता है कि आवेदक के खिलाफ अपराध का कोई मामला नहीं बनता।”
उल्लेखनीय है कि युवक कांग्रेस के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरजेवाला 21 अगस्त 2000 को वाराणसी में एक धरना प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे। यह प्रदर्शन संवासिनी कांड (नारी निकेतन की महिलाओं से जुड़ा एक कांड) में कांग्रेसी नेताओं को फंसाए जाने के खिलाफ था।
आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान, सुरजेवाला ने अपने समर्थकों के साथ तोड़फोड़ व पथराव किया और सरकारी अधिकारियों को अपना कार्य करने से रोका।
इस मामले में वाराणसी के कैंट थाने में एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया था। वर्तमान में यह मामला वाराणसी की विधायक-सांसद अदालत में लंबित है।
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