नयी दिल्ली, 19 जुलाई साख तय करने वाली एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने बुधवार को कहा कि सुधारों की गति अगले साल लोकसभा चुनाव के बाद ही तेज होने की संभावना है। उसने यह भी कहा कि चुनावी वर्ष में व्यय में थोड़ी बढ़ोतरी से भारत के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
रेटिंग एजेंसी के निदेशक एंड्रयू वुडवुड ने कहा, ‘‘ हमारा अनुमान है कि 2024 में संसदीय चुनाव पूरे होने तक देश में बड़े सुधार मुश्किल है। उसके बाद खासकर अगर अगली सरकार को मजबूत जनादेश मिलता है तो, संभवत: सुधारों की गति तेज हो सकती है, ।’’
एसएंडपी का अनुमान है कि केंद्र सरकार अपने राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल कर लेगी और राज्य सरकारें भी समय के साथ धीरे-धीरे अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत करेंगी।
वुड ने कहा, ‘‘चुनावी वर्ष के कारण व्यय में थोड़ी सी बढ़ोतरी से भारत के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। भारत में राजस्व वृद्धि भी अच्छी बनी हुई है और इससे राजकोषीय मजबूती को समर्थन मिल रही है।’’
वुड से सवाल किया गया था कि क्या चुनावी वर्ष में अधिक खर्च से राजकोषीय घाटे पर असर पड़ेगा, जिसके जवाब में उन्होंने यह बात कही।
राजकोषीय घाटा (सरकारी व्यय और राजस्व के बीच का अंतर) वित्त वर्ष 2021-22 में सकल घरेलू उत्पाद का 6.7 प्रतिशत रहा जो 2022-23 में घटकर 6.4 प्रतिशत पर आ गया।
चालू वित्त वर्ष में इसके जीडीपी का 5.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
भारत में अगले वर्ष लोकसभा चुनाव के अलावा पांच राज्यों राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और मिजोरम में विधानसभा चुनाव होने हैं।
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