देश की खबरें | रेड्डी ने कनाडा से वापस लाई गई देवी अन्नपूर्णा की मूर्ति उप्र सरकार को सौंपी

नयी दिल्ली, 11 नवंबर केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी किशन रेड्डी ने बृहस्पतिवार को देवी अन्नपूर्णा की मूर्ति यहां एक कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार को सौंपी। इस मूर्ति को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) कनाडा से वापस लाया है।

भारतीय आधुनिक कला संग्रहालय (एनजीएमए) में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय भवन एवं शहरी कार्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और राज्य मंत्री जनरल (सेवानिवृत्त) वीके सिंह समेत अन्य ने शिरकत की।

रेड्डी ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोशिशों से देवी अन्नपूर्णा की मूर्ति वापस भारत लाई गई है। इसे 100 साल से ज्यादा समय पहले चुरा लिया गया था।”

उन्होंने बताया कि 2014 के बाद से 40 से ज्यादा प्राचीन कालीन वस्तुओं को देश वापस लाया गया है जबकि 2014 से पहले मात्र 13 ऐसी चीज़ों को वापस लाया जा सका था। उन्होंने इन प्रचीन वस्तुओं को भारत वापस लाने में एएसआई और विदेश मंत्रालय के प्रयासों की सराहना की।

मंत्री ने कहा कि “देवी अन्नपूर्णा भोजन और पोषण की देवी हैं और उनके आशीर्वाद से भारत सरकार खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू करके भारत के सभी लोगों के लिए भोजन सुनिश्चित कर रही है। यह कानून कोविड के समय गरीब लोगों के लिए बहुत फायदेमंद रहा है।”

उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार जल्द ही दो मूर्तियां तमिलनाडु को, तथा एक-एक मूर्ति आंध्र प्रदेश और राजस्थान को सौंपेगी।

केंद्रीय संस्कृति राज्यमंत्री मीनाक्षी लेखी ने कहा, “समय बदल गया है। पहले भारत के सांस्कृतिक प्रतीकों को बाहर ले जाया जाता था, लेकिन अब इसमें सुधार का काम शुरू हो गया है और जो खजाने खो गए थे, उन्हें अब भारत वापस लाया जा रहा है।”

एएसआई को 15 अक्टूबर 2017 को देवी अन्नपूर्णा की मूर्ति मिली है। चोरी कर ली गई यह मूर्ति 17 गुणा नौ गुणा चार सेंटिमीटर की है। इसे एक सदी से ज्यादा समय पहले उत्तर प्रदेश में काशी से चुराया गया था और तस्करी करके कनाडा ले जाया गया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 नवंबर 2020 को अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में कनाडा से इस मूर्ति के वापस लाने की घोषणा की थी।

18वीं सदी की मूर्ति रेजिना विश्वविद्यालय के ‘मैकेंज़ी आर्ट गैलरी’ में रखी थी। विश्वविद्यालय ने पिछले साल इस मूर्ति को भारत के उच्चायुक्त को सौंपा था।

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