नयी दिल्ली, नौ अगस्त केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने पश्चिम बंगाल में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) कर्मियों की फर्जी कागजात के आधार पर कथित अवैध भर्ती की जांच की जिम्मेदारी संभाल ली है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देश पर केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस सिलसिले में प्राथमिकी दर्ज की है।
एजेंसी ने आरोपों की जांच के लिए उच्च न्यायालय के निर्देश पर प्राथमिक जांच की थी। आरोप है कि कई अवैध उम्मीदवारों की सशस्त्र बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर भर्ती की गई, जिनमें कुछ पाकिस्तानी नागरिकों को भी फायदा पहुंचा।
न्यायमूर्ति जय सेनगुप्ता ने कहा, ‘‘जैसा कि उसके (सीबीआई के) द्वारा दाखिल रिपोर्ट से प्रतीत होता है, सशस्त्र बलों की भर्ती में अब तक कोई अनियमितता नहीं पाई गई है। हालांकि, जहां तक केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में भर्ती की बात है, कुछ अनियमितताओं का पहले ही पता चल चुका है। प्रारंभिक जांच के दौरान, कम से कम ऐसे चार उदाहरण सामने आये हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘सीमावर्ती राज्य होने के नाते पश्चिम बंगाल केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में भर्ती के लिए होने वाली परीक्षाओं में कम कटऑफ अंक रखता है।’’
न्यायमूर्ति सेनगुप्ता ने उप सॉलिसिटर जनरल की दलीलों का हवाला देते हुए कहा, ‘‘इससे ऐसा लगता है कि अन्य राज्यों, खास तौर पर देश के उत्तरी राज्यों के लोगों ने फर्जी दस्तावेजों के जरिये खुद को पश्चिम बंगाल का मूल निवासी प्रदर्शित किया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मूल निवास प्रमाणपत्र, मैट्रिक प्रमाणपत्र और जाति प्रमाणपत्र में फर्जीवाड़ा किया गया। इस बात की कहीं अधिक गहराई से जांच किए जाने की जरूरत है कि क्या विदेशी नगारिकों ने भी भारतीय सुरक्षाबलों में भर्ती के लिए यही तरीका अपनाया।’’
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