मुंबई/पुणे, दो अगस्त महाराष्ट्र के किसान संघ शेतकारी संगठन के अध्यक्ष अनिल घनवट ने मंगलवार को कहा कि किसानों में यह भावना है कि आज़ादी के 75 साल होने के बावजूद उन्हें असल स्वतंत्रता नहीं मिली है, इसलिए वे ‘हर घर तिरंगा’ पहल का हिस्सा नहीं बनेंगे।
‘हर घर तिरंगा’ अभियान केंद्र सरकार ने शुरू किया है, जिसके तहत लोगों को घरों में राष्ट्रीय ध्वज लाना और भारत की आज़ादी के 75 साल पूरे होने पर इसे फहराने के लिए प्रोत्साहित करना है।
अब निरस्त किए जा चुके विवादित कृषि कानूनों पर उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित समिति के सदस्य रहे घनवट ने कहा कि वह देश के एक नागरिक के तौर पर स्वतंत्र हैं, लेकिन किसान के तौर पर खुश नहीं हैं, क्योंकि किसान को कृषि क्षेत्र में कई नियमों से बांध कर रखा गया है।
उन्होंने कहा कि उनके संगठन ने एक पत्र लिखा है, जिसमें अहम मुद्दों पर किसानों की भावनाओं का उल्लेख है और इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को भेजा जाएगा।
घनवट ने कहा, “ किसानों में आम भावना है कि उन्हें कभी आजादी नहीं मिली और किस तरह का 'आजादी का अमृत महोत्सव' मनाया जाना चाहिए। लाखों किसान खुदकुशी कर रहे हैं... मौत को गले लगा रहे हैं।”
उन्होंने कहा “किसानों को देश की आजादी पर गर्व है और वे हमेशा की तरह 15 अगस्त मनाएंगे, लेकिन हम 'हर घर तिरंगा' समारोह मनाने के इच्छुक नहीं हैं।”
घनवट ने कहा, “ इस तरह की भावना है कि असली आजादी कभी भी भारत के किसानों तक पहुंची ही नहीं, इसलिए वे ‘हर घर तिरंगा’ पहल का हिस्सा नहीं होंगे।”
उन्होंने कहा कि संविधान में पहला संशोधन करके उसमें नौंवी अनुसूची को शामिल किया गया, जिसका मतलब है कि इस अनुसूची में रखे गए कानूनों को अदालतों में चुनौती नहीं दी जा सकती है।
घनवट ने कहा, “ मिसाल के तौर पर अगर केंद्र सरकार कृषि उपज के निर्यात पर प्रतिबंध लगाती है, तो हम इसके खिलाफ अपील नहीं कर सकते। अगर किसी बुनियादी ढांचा परियोजना के लिए किसी किसान की जमीन का अधिग्रहण किया जाता है, तो वह इसका विरोध भी नहीं कर सकता है या अदालत के हस्तक्षेप की मांग नहीं कर सकता है।”
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY