देश की खबरें | एमसीडी की स्थायी समिति का पुनर्निर्वाचन : भाजपा का महापौर पर दुर्भावनापूर्ण तरीके से कामकाज का आरोप

नयी दिल्ली, 11 मई भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दिल्ली नगर निगम(एमसीडी) की स्थायी समिति के छह सदस्यों के फिर से चुनाव की मांग को लेकर महापौर शैली ओबेरॉय पर दुर्भावनापूर्ण तरीके से काम करने का आरोप लगाया है।

भाजपा ने दिल्ली उच्च न्यायालय में बृहस्पतिवार को कहा कि शैली ओबेरॉय ने चुनाव परिणामों को ''राजनीतिक रूप से अरुचिकर'' मानने के बाद फिर से चुनाव की मांग की थी।

दो पार्षदों की ओर से न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव के समक्ष पेश वरिष्ठ वकीलों ने कहा कि ओबेरॉय, जो रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) भी हैं, उन्होंने 'कानून में गैर-मान्यता प्राप्त' तरीके से एक वोट को अमान्य करार दिया और चुनाव प्रक्रिया को बाधित किया।

महापौर ने 24 फरवरी को दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की स्थायी समिति के छह सदस्यों के चुनाव के लिए नए सिरे से 27 फरवरी को पूर्वाह्न 11 बजे मतदान कराने की घोषणा की थी।

उच्च न्यायालय ने पार्षद कमलजीत सहरावत और शिखा रॉय की याचिका पर 25 फरवरी को फिर से चुनाव कराने पर रोक लगा दी थी।

सहरावत की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने कहा कि विजेता को निर्धारित करने वाले कोटा का पता लगाने से पहले एक वोट की अमान्यता का समर्थन किया जाना चाहिए, लेकिन मौजूदा मामले में महापौर ने बाद के चरण में एक वोट को गलत तरीके से अमान्य करार दिया।

महेश जेठमलानी ने कहा, ‘‘ यह रिस इप्सा लोक्विटुर (चीजें अपना स्पष्टीकरण स्वयं देती हैं) हैं। यह महापौर की मंशा को दर्शाता है। प्रतिकूल परिणाम पर महापौर ने कार्योत्तर कार्रवाई की। महापौर ने स्पष्ट रूप से दुर्भावनापूर्ण रूप से कार्य किया, यह रिट अदालत के हस्तक्षेप के लिए एक अच्छा आधार है। ’’

महापौर की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल मेहरा ने कहा कि जब चुनाव प्रक्रिया पूरी होनी बाकी हो तो अदालत को याचिकाओं पर विचार नहीं करना चाहिए।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 25 फरवरी को 27 फरवरी को होने वाले छह सदस्यों के पुनर्निर्वाचन पर यह कहते हुए रोक लगा दी थी कि महापौर ने प्रथम दृष्टया नए चुनाव का आदेश देकर अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया है।

एमसीडी के सदन में 22 फरवरी को पदों के लिए मतदान के दौरान भाजपा और आम आदमी पार्टी के सदस्यों के बीच मारपीट हुई थी और एक-दूसरे पर प्लास्टिक की बोतलें फेंकी गयी थीं। इसके परिणामस्वरूप सदन में भारी हंगामा हुआ था।

इस मामले की अगली सुनवाई 12 मई को होगी।

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