देश की खबरें | राउत ने डीसीपी के स्थानांतरण, पारनेर के पार्षदों के मुद्दे को तवज्जो नहीं दी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. शिवसेना नेता संजय राउत ने मंगलवार को दावा किया कि महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महा विकास आघाडी (एमवीए) के सहयोगी दलों के बीच कोई मतभेद नहीं है।

मुंबई, सात जुलाई शिवसेना नेता संजय राउत ने मंगलवार को दावा किया कि महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महा विकास आघाडी (एमवीए) के सहयोगी दलों के बीच कोई मतभेद नहीं है।

मीडिया की खबरों में यह दावा किया गया कि मुंबई में दस पुलिस अधिकारियों के स्थानांतरण और अहमदनगर जिले के पारनेर में शिवसेना के पांच पार्षदों के पिछले हफ्ते शरद पवार नीत दल में शामिल होने को लेकर दोनों दलों के बीच तनाव है।

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राउत ने संवाददाताओं से बात करते हुए दोनों ही बातों को तवज्जो नहीं दी।

राउत ने कहा, ‘‘महा विकास आघाडी में समन्वय की कमी नहीं है। और जैसा विपक्ष के नेता देवेन्द्र फडणवीस कह रहे हैं, कोई अंदरूनी मतभेद नहीं है।’’

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उन्होंने कहा, ‘‘महा विकास आघाडी के शब्दकोश में अंदरूनी मतभेद जैसी कोई शब्दावली नहीं है।’’

उन्होंने कहा कि एमवीए के नेता साथ बैठकर निर्णय करते हैं।

शिवसेना नेता ने कहा कि महा विकास आघाडी सरकार देश के तीन बड़े दलों ने मिलकर बनाई है। यह कोई 'खिचड़ी' नहीं है। यह सरकार अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेगी।

उन्होंने कहा कि राकांपा प्रमुख शरद पवार ने उन्हें दिए साक्षात्कार में कहा था कि सरकार पूरे पांच वर्षों तक चलेगी।

शिवसेना के मुखपत्र सामना के कार्यकारी संपादक राउत ने हाल में पवार का साक्षात्कार लिया था। साक्षात्कार का अभी तक प्रकाशन नहीं हुआ है।

मुंबई में दस पुलिस उपायुक्तों के स्थानांतरण और फिर इस आदेश को वापस लेने के बारे में उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर शिवसेना और राकांपा के बीच अविश्वास नहीं है।

एनसीपी नेता अनिल देशमुख के पास गृह विभाग है।

राउत ने स्थानांतरण को लेकर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को जानकारी नहीं होने की बात को खारिज करते हुए कहा कि सरकार के संचालन के दौरान इस तरह के वाकये होते हैं। यह पहली बार नहीं है कि स्थानांतरण रोके गये।

पारनेर के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि दोनों दलों ने इस पर चर्चा की है।

राउत ने कहा, ‘‘हमारे कुछ पार्षद अजित दादा (उपमुख्यमंत्री और राकांपा नेता अजित पवार) की मौजूदगी में राकांपा में शामिल हुए। इसका यह मतलब नहीं है कि अजित दादा या किसी अन्य वरिष्ठ नेता (राकांपा) ने उन पार्षदों का शिकार कर लिया... हां इस तरह के निर्णय करने से पहले हमें एक-दूसरे से बात करनी चाहिए।’’

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