ताजा खबरें | राज्यसभा ने दी अधिवक्ता संशोधन विधेयक को मंजूरी

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. राज्यसभा ने बृहस्पतिवार को अधिवक्ता (संशोधन) विधेयक 2023 को ध्वनिमत से पारित कर दिया जिसमें दलाली पर रोक लगाने एवं कानूनी पेशे के नियमन को बेहतर बनाने के लिए प्रावधान किए गए हैं।

नयी दिल्ली, तीन अगस्त राज्यसभा ने बृहस्पतिवार को अधिवक्ता (संशोधन) विधेयक 2023 को ध्वनिमत से पारित कर दिया जिसमें दलाली पर रोक लगाने एवं कानूनी पेशे के नियमन को बेहतर बनाने के लिए प्रावधान किए गए हैं।

विधेयक पर चर्चा से पहले विपक्षी दलों के सदस्यों ने मणिपुर मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बयान की मांग को लेकर सदन से बहिर्गमन किया।

विधेयक पर हुई संक्षिप्त चर्चा के दौरान सदस्यों ने पुराने अप्रासंगिक कानूनों को हटाए जाने की सराहना की और कहा कि नए वकीलों को प्रशिक्षण मुहैया कराया जाना चाहिए। सदस्यों ने मद्रास उच्च न्यायालय का नाम तमिलनाडु उच्च न्यायालय किए जाने की भी मांग की।

चर्चा में सदस्यों ने यह भी कहा कि सरकार को ध्यान देना चाहिए कि इस विधेयक के प्रावधानों से नए वकीलों को परेशानी नहीं हो। सदस्यों ने वकीलों की सुरक्षा के लिए कानून बनाए जाने की भी मांग की। चर्चा के दौरान वकीलों की फीस के नियमन की भी मांग उठी।

चर्चा का जवाब देते हुए विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार के कार्यकाल में स्वच्छ भारत अभियान चल रहा है, ऐसे में न्यायालयों को भी साफ-सुथरा होना चाहिए। उनका आशय इस विधेयक के प्रावधान से था जिसमें अदालत परिसरों से दलालों को हटाए जाने का प्रावधान किया गया है।

मंत्री के जवाब के बाद उच्च सदन ने विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया।

मेघवाल ने कहा कि विधेयक के पहले विभिन्न पक्षों के साथ विमर्श किया गया और उनका सुझाव था कि न्यायालय परिसर में दलालों की मौजूदगी उचित नहीं है।

वकीलों की सुरक्षा के लिए कानून की मांग क संबंध में उन्होंने कहा कि यह विषय राज्यों से संबंधित है लेकिन सरकार इस संबंध में राज्यों से बातचीत कर उचित कदम उठाने का प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि वकीलों को बीमा मुहैया कराने के बारे में भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार उन पुराने कानूनों को खत्म करने का प्रयास कर रही है जिनकी अब जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार 1562 कानूनों को खत्म कर रही है ताकि नागरिकों को आसानी हो।

विधेयक के कारणों और उद्देश्य के अनुसार 1961 के अधिवक्ता कानून में संशोधन किया जाएगा। इसमें विभिन्न न्यायालयों में दलालों की सूची बनाने का प्रावधान किया गया है।

इसके अनुसार उच्च न्यायालय, जिला न्यायाधीश, सत्र न्यायाधीश और प्रत्येक राजस्व अधिकारी (जिलाधिकारी के रैंक से कम नहीं होना चाहिए) समुचित जांच के बाद दलालों की सूची बना सकेंगे। इसमें यह भी कहा गया कि जिस व्यक्ति का नाम दलालों की सूची में डाला जाएगा, उससे पहले उसे अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा।

विधेयक में प्रावधान किया गया है कि ऐसे दलालों की सूची प्रत्येक अदालत में लगायी जाएगी। किसी व्यक्ति का नाम दलालों की सूची में आने पर उसे तीन माह तक की सजा या 500 रूपये का अर्थदंड या दोनों लगाये जा सकते हैं।

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