देश की खबरें | राजस्थान:स्पीकर ने शीर्ष न्यायालय से याचिका वापस ली, राज्यपाल ने सशर्त सत्र बुलाने के दिये संकेत

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने सोमवार को राज्य सरकार से कहा कि यदि उसका उद्देश्य विधानसभा में शक्ति परीक्षण करना है, तो सदन का सत्र अल्प अवधि के नोटिस पर बुलाया जा सकता है। दरअसल, यह कांग्रेस की मांग को सशर्त स्वीकार किया जाना प्रतीत होता है क्योंकि पार्टी ने विरोध-प्रदर्शन किये हैं और इस प्रकरण में राष्ट्रपति से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

जयपुर/नयी दिल्ली, 27 जुलाई राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने सोमवार को राज्य सरकार से कहा कि यदि उसका उद्देश्य विधानसभा में शक्ति परीक्षण करना है, तो सदन का सत्र अल्प अवधि के नोटिस पर बुलाया जा सकता है। दरअसल, यह कांग्रेस की मांग को सशर्त स्वीकार किया जाना प्रतीत होता है क्योंकि पार्टी ने विरोध-प्रदर्शन किये हैं और इस प्रकरण में राष्ट्रपति से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राजभवन सहित विभिन्न राज्यों की राजधानियों में आज प्रदर्शन कर राजस्थान विधानसभा का सत्र बुलाये जाने की मांग की।

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राज्यपाल ने विधानसभा का सत्र बुलाने संबंधी राज्य मंत्रिमंडल का संशोधित प्रस्ताव कुछ 'बिंदुओं' के साथ अशोक गहलोत सरकार को वापस भेज दिया है।

राज्यपाल ने प्रस्ताव वापस करते हुए राज्य सरकार को भेजे ‘नोट’ में तीन बातों का उल्लेख करते हुए एक नया प्रस्ताव तैयार करने को कहा है। इसमें यह भी शामिल है कि विधानसभा का सत्र 21 दिन का स्पष्ट नोटिस देकर बुलाया जाए। मिश्र ने दूसरी बार इस तरह का प्रस्ताव वापस भेजा है।

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राज्यपाल के ‘नोट’ में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को विकल्प की भी पेशकश की गई है, जो सचिन पायलट और कांग्रेस के 18 अन्य विधायकों की बगावत के बाद अपनी सरकार बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं।

एक ओर जहां कांग्रेस ने बाहर में केंद्र और भाजपा के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन तेज कर दिया है, वहीं दूसरी ओर राजस्थान में सत्तारूढ़ दल (कांग्रेस) ने उच्चतम न्यायालय में अपनी कानूनी लड़ाई समाप्त करते हुए राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ अपनी याचिका वापस ले ली है।

शीर्ष न्यायालय ने राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ दायर याचिका वापस लेने की सोमवार को अनुमति दी, जिसमें उपमुख्यमंत्री पद से बर्खास्त किए जा चुके सचिन पायलट और कांग्रेस के 18 बागी विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने की कार्यवाही 24 जुलाई तक स्थगित करने के लिए कहा गया था।

विधानसभा अध्यक्ष सी. पी. जोशी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अगुवाई वाली पीठ को बताया कि राजस्थान उच्च न्यायालय ने 24 जुलाई को नया आदेश दिया और वे कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।

सिब्बल ने याचिका वापस लेते हुए न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा पीठ से कहा कि अध्यक्ष को बागी विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने की कार्यवाही स्थगित करने के लिए कहने संबंधी उच्च न्यायालय के 21 जुलाई के आदेश पर शीर्ष अदालत ने रोक नहीं लगाई, जिसके कारण इस याचिका का अब कोई औचित्य नहीं है।

वहीं, राजस्थान उच्च न्यायालय ने कांग्रेस में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के छह विधायकों के विलय के खिलाफ भाजपा विधायक मदन दिलावर की याचिका सोमवार को खारिज कर दी। अदालत के इस फैसले से गहलोत खेमे को कुछ राहत मिली है।

राज्यपाल मिश्र ने विधानसभा का सत्र बुलाए जाने को लेकर सरकार को जिन तीन बिन्दुओं के साथ नया प्रस्ताव तैयार करने में कहा है, वे हैं... 21 दिन का नोटिस, यदि शक्ति परीक्षण होता है तो उस कार्यवाही का सीधा प्रसारण किया जाना और कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लिए विधानसभा भवन के भीतर दो गज की दूरी के नियम का पालन।

नोट में यह भी कहा गया है कि मीडिया आ रहे सरकार के बयानों से लगता है कि वह सदन में शक्ति परीक्षण करना चाहती है, लेकिन यह बात प्रस्ताव में शामिल नहीं है।

राजभवन से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, राज्यपाल ने कहा, ‘‘यदि सरकार विश्वास प्रस्ताव लाना चाहती है, तो फिर यह विधानसभा का सत्र बुलाने के लिए तर्कपूर्ण आधार बन सकता है।’’

इससे पहले, कांग्रेस विधायक दल ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को एक ज्ञापन देकर विधानसभा सत्र बुलाने के मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री गहलोत ने विधायक दल की बैठक में बताया कि उन्होंने राज्य के मौजूदा राजनीतिक हालात पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी बात की है। उन्होंने कुछ दिन पहले ही इस संबंध में मोदी को पत्र लिखा है।

राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में राजस्थान में गहलोत सरकार गिराने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया गया है।

गहलोत की अध्यक्षता वाले विधायक दल का कहना है कि सरकार को विधानसभा का सत्र बुलाने नहीं दिया जा रहा है, जबकि वह सदन में कोरोना वायरस महामारी और राज्य की अर्थव्यवस्था पर चर्चा करना चाहती है।

केंद्रीय कानून मंत्री के रह चुके कांग्रेस के तीन नेताओं ने भी राज्यपाल पर दबाव बनाया है।

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार में कानून मंत्री रहे कपिल सिब्बल, सलमान खुर्शीद और अश्वनी कुमार ने आज राज्यपाल मिश्र से कहा कि राज्य मंत्रिमंडल की अनुशंसा पर विधानसभा सत्र बुलाने में विलंब करने से संवैधानिक गतिरोध पैदा हुआ है जिसे पहले ही टाला जा सकता था।

उन्होंने मिश्र को पत्र लिखकर यह आग्रह भी किया कि वह अशोक गहलोत मंत्रिमंडल की सिफारिश पर विधानसभा सत्र बुलाएं क्योंकि ऐसा नहीं करने से संवैधानिक संकट पैदा होगा।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने पत्र में कहा, ‘‘भारत सरकार के पूर्व कानून मंत्री और कानून के विद्यार्थी के तौर पर हमारी स्पष्ट राय है कि स्थापित कानूनी व्यवस्था के तहत राज्य कैबिनेट की सलाह पर विधानसभा का सत्र बुलाने के लिए राज्यपाल बाध्य है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘राज्यपाल पद पर आसीन होने के नाते आप इससे अच्छी तरह अवगत हैं कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को संविधान के तहत ली गई शपथ का अक्षरश: निर्वहन करना होता है। संवैधानिक एवं संसदीय लोकतंत्र की परंपराओं के मुताबिक राज्यपाल निर्वाचित सरकार के विवेक से सहमति जताने को बध्य होता है क्योंकि ये सरकारें जनता की भावना को प्रकट करती हैं।’’

पार्टी के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने यह आरोप भी लगाया कि विधानसभा सत्र बुलाने से जुड़े राज्य कैबिनेट के प्रस्ताव को ‘नहीं मानना’ कानून और संवैधानिक परंपराओं के खिलाफ है तथा ऐसे कदमों से संसदीय लोकतंत्र कमजोर होता है।

उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट से भी पूछा जाना चाहिए कि विधानसभा सत्र बुलाए जाने की मांग के संदर्भ में उनकी क्या राय है।

चिदंबरम ने वीडियो लिंक के माध्यम से संवाददाताओं से कहा, ‘‘ मैं आशा करता हूं कि जिस तरह से संविधान का उल्लंघन किया जा रहा है, राष्ट्रपति उसका संज्ञान लेंगे और इन हालात में जो सही है वो करेंगे।’’

कांग्रेस में राजस्थान के महासचिव प्रभारी अविनाश पांडेय ने कहा कि पार्टी इस लड़ाई में ‘‘लोकतंत्र के सभी हथियारों का उपयोग करेगी।’’

गौरतलब है कि राज्य विधानसभा में कांग्रेस के 107, जबकि भाजपा के 72 विधायक हैं। लेकिन पायलट सहित 19 विधायकों की बगावत के बाद कांग्रेस सरकार संकट की स्थिति का सामना कर रही है।

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