जयपुर, 21 अक्टूबर राजस्थान सरकार "मीना " व "मीणा " के विवाद को खत्म करने के लिए एक बार फिर केंद्र सरकार को पत्र लिखेगी और उससे आग्रह करेगी कि "मीना " और "मीणा " को एक ही मानकर इस विवाद को समाप्त किया जाए।
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने संघ लोक सेवा आयोग द्वारा निकाली गयी एक रिक्ति का जिक्र करते हुए बुधवार को यह बात कही।
उन्होंने ट्वीट किया, "संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय में कंपनी प्रॉसीक्यूटर के पद पर भर्ती के लिये विज्ञापन जारी किया गया है। इसमें मीना जाति वाले अभ्यर्थियों को अनुसूचित जनजाति का मानकर आरक्षण के लाभ के लिये पात्र माना गया है, जबकि मीणा उपनाम वाले अभ्यर्थियों को पात्र नहीं माना गया है। "
गहलोत के अनुसार, राजस्थान में मीना/मीणा दोनों उपनाम वाले लोगों को अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र जारी किये जाते रहे हैं।
यह भी पढ़े | Maharashtra: पालघर लिंचिंग मामले में 208 नए आरोपी नामित, CID ने 50 को दबोचा.
मुख्यमंत्री ने लिखा है कि "मीना " और "मीणा " के मुद्दे पर माननीय उच्च न्यायालय में भी कई रिट याचिकाएं दायर की गईं हैं जिस पर राजस्थान सरकार की ओर से मुख्य सचिव ने न्यायालय में शपथ पत्र देकर स्पष्ट किया है कि मीना/मीणा दोनों एक ही जाति है। इनमें केवल वर्तनी का अंतर है।
उन्होंने लिखा है कि राजस्थान सरकार ने मीना/मीणा विवाद के संदर्भ में राज्य सरकार की स्थिति साफ करते हुये केंद्र सरकार द्वारा स्पष्टीकरण जारी करने के लिये 2018 में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय को पत्र लिखा था जिसका केंद्र सरकार ने अभी तक जवाब नहीं दिया है।
गहलोत ने कहा कि राजस्थान सरकार ‘मीना’ और ‘मीणा’ को एक ही मानकर इस विवाद को खत्म करने के लिये फिर से केंद्र सरकार को पत्र लिखेगी।
पृथ्वी कुंज
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY