जरुरी जानकारी | बिजली क्षेत्र में बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है राजस्थान: रिपोर्ट

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. देश में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के मामले में राजस्थान अगुवाई कर सकता है और कम लागत, निम्न कार्बन उत्सर्जन और लाभदायक बिजली प्रणाली की ओर भारत के आगे बढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इंस्टीट्यट फॉर एनर्जी इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंशियल एनालिसिस (आईईएफए) ने बृहस्पतिवार को एक रिपोर्ट में यह कहा।

नयी दिल्ली, 17 सितंबर देश में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के मामले में राजस्थान अगुवाई कर सकता है और कम लागत, निम्न कार्बन उत्सर्जन और लाभदायक बिजली प्रणाली की ओर भारत के आगे बढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इंस्टीट्यट फॉर एनर्जी इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंशियल एनालिसिस (आईईएफए) ने बृहस्पतिवार को एक रिपोर्ट में यह कहा।

रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में नवीकरणीय ऊर्जा की स्थापित क्षमता 2019-20 में 9,600 मेगावाट पहुंच गयी।

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आईईएफए ने कहा, ‘‘भारत नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में आगे बढ़ने पर जोर दे रहा है, अध्ययन में पाया गया कि राजस्थान कम लागत, निम्न कार्बन उत्सर्जन और लाभदायक बिजली प्रणाली की ओर भारत के बढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।’’

राजस्थान ने पिछले वित्त वर्ष 2019-20 में अन्य राज्यों के मुकाबले सर्वाधिक 1,700 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ी। वहीं कर्नाटक ने 1,400 मेगावाट क्षमता का इजाफा किया जबकि स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता के मामले में यह दक्षिणी राज्य आगे है। तमिलनाडु ने इस दौरान 1,300 मेगावाट क्षमता जोड़ी।

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आईईएफए के शोध विश्लेषक और रिपोर्ट लिखने वाले के. शाह ने कहा, ‘‘नवीकरणीय ऊर्जा के मामले में राजस्थान का भविष्य उज्ज्वल है। लेकिन वहां की वितरण कंपनियों का प्रदर्शन बदतर है।’’

महंगे कोयला आधारित बिजली की महंगी दरों के साथ उच्च तकनीकी और वाणिज्यिक (एटी एंड सी) नुकसान से राजस्थान की वितरण कंपनियों का घाटा राज्य सरकार की सब्सिडी के आकलन के बाद 2019-20 में 6,355 करोड़ रुपये रहा।’’

शाह ने एक बयान में कहा, ‘‘सस्ती नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता से वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति बेहतर होगी और नकदी प्रवाह की समस्या दूर होगी।’’

राजस्थान उच्च सौर विकिरण और तेज हवा गति वाला राज्य है।

बयान के अनुसार राजस्थान में परिचालन वाली कुल स्थापित क्षमता में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी 43.5 प्रतिशत है। ग्रिड से जुड़े उत्पादन में हिस्सेदारी 17.6 प्रतिशत है।

वहीं, राज्य की 9,800 मेगावाट कोयला आधारित स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता की हिस्सेदारी कुल स्थापित क्षमता में 45 प्रतिशत है और ग्रिड से जुड़ी बिजली उत्पादन में हिस्सेदारी 56.5 प्रतिशत है।

शाह ने कहा, ‘‘हमारा अनुमान है कि बिजली क्षेत्र में व्यापक बदलाव आएगा और 2029-30 तक नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी कुल क्षमता में 74 प्रतिशत और कुल उत्पादन में 63 प्रतिशत होगी।’’

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