देश की खबरें | रेलवे की कोलकाता मेट्रो स्टील थर्ड रेल को ‘कम्पोजिट एल्यूमीनियम थर्ड रेल’ में परिवर्तित करने की योजना

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नयी दिल्ली, 30 अगस्त कोलकाता मेट्रो लंदन, मॉस्को, बर्लिन, म्यूनिख और इस्तांबुल की विशिष्ट मेट्रो प्रणालियों में शामिल होने को तैयार है, जिनमें स्टील से बनी रेल के बजाय ‘कम्पोजिट एल्यूमीनियम थर्ड रेल’ का इस्तेमाल किया गया है।

‘थर्ड रेल’ के किनारे लगे सुचालक के माध्यम से ट्रेन को विद्युत आपूर्ति की जाती है।

कोलकाता मेट्रो रेलवे में, मेट्रो रेक को बिजली की आपूर्ति स्टील थर्ड रेल के माध्यम से 750 वोल्ट डीसी पर ट्रेन को की जाती है।

रेल मंत्रालय ने बुधवार को कहा, ‘‘कोलकाता मेट्रो रेलवे पिछले 40 वर्षों से स्टील थर्ड रेल इस्तेमाल कर रहा है। कोलकाता मेट्रो रेलवे ने अब स्टील थर्ड रेल के साथ मौजूदा गलियारे में ‘रेट्रो फिटमेंट’ के साथ-साथ निर्माण के लिए किए जा रहे सभी आगामी गलियारों में कम्पोजिट एल्यूमीनियम थर्ड रेल का इस्तेमाल करने का निर्णय लिया है।’’

मंत्रालय ने कहा, ‘‘इस अत्याधुनिक बदलाव के साथ कोलकाता मेट्रो रेलवे अब लंदन, मॉस्को, बर्लिन, म्यूनिख और इस्तांबुल मेट्रो के समान आधुनिक सुविधाओं से युक्त हो जाएगी। इन स्थानों में भी स्टील थर्ड रेल से एल्यूमीनियम थर्ड रेल में मेट्रो परिवर्तित हुई है।’’

मंत्रालय ने बताया कि पहले चरण में दमदम से श्यामबाजार स्टेशनों के बीच के पहले चरण में मौजूदा स्टील थर्ड रेल को बदलने के लिए एक निविदा जारी की गई है। उसने बताया कि दूसरे चरण में श्यामबाजार से सेंट्रल और जेडी पार्क से टॉलीगंज तक काम शुरू किया जाएगा। तीसरे चरण में महानायक उत्तम कुमार (टॉलीगंज) से कवि सुभाष (न्यू गरिया) के बीच के खंड पर काम शुरू किया जाएगा।

उसने बताया कि इस प्रकार इस चरण में कुल 35 आरकेएम (रूट किलोमीटर) मुख्य लाइन पर थर्ड रेल को बदला जाएगा।

मंत्रालय ने बताया कि स्टील थर्ड रेल की तुलना में कम ट्रैक्शन सबस्टेशन यानी 35 किमी मेट्रो कॉरिडोर के लिए लगभग 210 करोड़ रुपये के पूंजी निवेश की सीधी बचत होगी।

मंत्रालय के मुताबिक ‘कम्पोजिट एल्यूमिनियम थर्ड रेल’ का इस्तेमाल करके प्रति वर्ष अनुमानित ऊर्जा बचत लगभग 67 लाख यूनिट हो सकती है।

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