देश की खबरें | रेलवे ने धूम्रपान एवं ज्वलनशील पदार्थ की ढुलाई के विरूद्ध पहलों की घोषणा की

नयी दिल्ली, 23 मार्च रेलवे ने हाल में चलती ट्रेनों में आग लगने की कुछ घटनाओं की संभवत: वजह रहे धूम्रपान और ज्वलनशील पदार्थों की ढुलाई के विरूद्ध मंगलवार को कुछ कदमों की घोषणा की।

उसने अपने जोनों को रेल उपयोगकर्ताओं, कर्मियों समेत सभी संबंधित पक्षों को आग की घटनाओं के विरूद्ध बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में जागरूक करने के लिए सात दिनों का एक जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया है।

ट्रेनों में ज्वलनशील पदार्थ ले जाना रेलवे अधिनियम की धारा 164 के तहत दंडनीय अपराध है और ऐसा करने वालों को तीन साल तक की कैद हो सकती है या 1000 रुपये का जुर्माना हो सकता है या फिर दोनों हो सकता है। धारा 165 के तहत 500 रुपये के जुर्माने की व्यवस्था है।

ये निर्देश तब जारी किये गये हैं जब न केवल चलती ट्रेनों बल्कि रेल परिसरों से आग संबंधी घटनाएं सामने आयी हैं। उनमें दिल्ली-शताब्दी एक्सप्रेस में आग की घटना शामिल है, जिसमें प्रारंभिक जांच में सामने आया कि शौचालय के कूड़ेदान में फेंक दी गयी जलती सिगरेट की वजह से आग लगी।

दिल्ली-भुवनेश्वर राजधानी में शॉर्ट सर्किट, इलाहाबाद और मुम्बई के लोकमान्य तिलक टर्मिनल के बीच चलने वाली दूरंतो ट्रेन से धुआं निकलने, कोच फैक्टरियों के परिसरों से आग की मामूली घटनाएं आदि सामने आयी हैं।

सबसे भयावह घटना इसी माह पूर्वी रेलवे के मुख्यालय कोलकाता की है, जहां नौ लोगों की जान चली गयी थी।

एक निर्देश में रेलवे बोर्ड ने कहा कि उनमें ‘धूम्रपान निषेध’ नियम, रेल के माध्यम से ज्वलनशील सामग्री की ढुलाई पर रोक, पर्चे, स्टिकर आदि के वितरण के माध्यम से जागरूकता फैलाना, नुक्कड़ नाटक, स्टेशनों पर सार्वजनिक संबोधन प्रणाली के जरिए घोषणाएं तथा प्रिंट, इलेक्ट्रोनिक एवं सोशल मीडिया के जरिए विज्ञापन देना आदि शामिल हैं।

जोनों को ट्रेनों एवं रेलवे परिसरों में धूम्रपान के विरूद्ध अभियान चलाने का भी निर्देश दिया गया है और उल्लंघनकर्ताओं पर रेलवे कानून या तंबाकू कानून के संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है।

रेलवे ने ट्रेनों में ज्वलनशील एवं विस्फोटक सामग्री (एलपीजी सिलेंडर) की ढुलाई के विरूद्ध नियमित जांच का सुझाव दिया है तथा उल्लंघनकर्ता पर रेलवे कानून की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है।

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