देश की खबरें | केएनपी में छह चीतों के रेडियो कॉलर स्वास्थ्य परीक्षण के लिए हटाए गए: वन अधिकारी

भोपाल, 24 जुलाई मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छह चीतों के रेडियो कॉलर केएनपी के पशु चिकित्सकों और नामीबिया व दक्षिण अफ्रीका के विशेषज्ञों द्वारा उनके "स्वास्थ्य परीक्षण" के लिए हटा दिये गए हैं। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

इस साल मार्च से अब तक श्योपुर जिले के केएनपी में पांच वयस्क चीते और तीन शावकों की मौत हो चुकी है।

एक अधिकारी ने कहा कि कुल 11 चीते - छह नर और पांच मादा - वर्तमान में बोमा (बाड़े) के अंदर हैं।

अधिकारी ने कहा, "स्वास्थ्य परीक्षण के लिए अब तक केएनपी पशु चिकित्सकों और नामीबिया एवं दक्षिण अफ्रीका के विशेषज्ञों द्वारा छह चीतों के रेडियो कॉलर हटाये गए हैं।’’

अधिकारी ने बताया कि जिन चीतों के रेडियो कॉलर हटाये गए हैं उनकी पहचान गौरव, शौर्य, पवन, पावक, आशा और धीरा के रूप में की गई है। उन्होंने बताया, "ये सभी चीते स्वस्थ हैं।’’

शनिवार को जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में यह भी कहा गया कि नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका के विशेषज्ञों के साथ कूनो की पशु चिकित्सा टीम द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण के उद्देश्य से छह चीतों के रेडियो कॉलर हटाये गए हैं।

मध्य प्रदेश के मुख्य वन्यजीव वार्डन असीम श्रीवास्तव ने चीतों के स्वास्थ्य परीक्षण के पीछे के कारणों के बारे में विस्तार से नहीं बताया।

देश में चीतों को फिर से बसाने की योजना ‘प्रोजेक्ट चीता’ के तहत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से रेडियो कॉलर पहने 20 चीतों को केएनपी लाया गया था। इनमें से नामीबियाई चीता ज्वाला से चार शावक केएनपी में पैदा हुए थे। इन 24 चीतों में से तीन शावकों सहित आठ चीतों की मौत हो चुकी है।

पर्यावरण मंत्रालय ने 16 जुलाई को कहा कि नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए 20 वयस्क चीतों में से पांच की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई जबकि रेडियो कॉलर जैसे कारकों को मौत के लिए जिम्मेदार ठहराने वाली मीडिया की खबरें वैज्ञानिक सबूत के बिना, अटकलों और अफवाहों पर आधारित थीं।

मंत्रालय ने यह भी कहा कि चीता परियोजना का समर्थन करने के लिए कई कदमों की योजना बनाई गई है जिसमें बचाव, पुनर्वास, क्षमता निर्माण और व्याख्या की सुविधाओं के साथ चीता अनुसंधान केंद्र की स्थापना भी शामिल है।

उच्चतम न्यायालय ने 20 जुलाई को कहा कि केएनपी में एक साल से भी कम समय में आठ चीतों की मौत एक अच्छी तस्वीर पेश नहीं करती है और केंद्र से कहा कि वह इसे प्रतिष्ठा का मुद्दा न बनाए और जानवरों को विभिन्न अभयारण्यों में स्थानांतरित करने की संभावना तलाशे।

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