देश की खबरें | बीच वाली सीट खाली रखने संबंधी जनहित याचिका: विशेषज्ञ विमानन समिति ने अदालत को सौंपी रिपोर्ट

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मुंबई, पांच जून नागर विमानन मंत्रालय की एक विशेषज्ञ समिति ने बम्बई उच्च न्यायालय से शुक्रवार को कहा कि कोरोना वायरस से संक्रमित किसी व्यक्ति के केवल छू लेने से संक्रमण नहीं फैलता।

नागर विमानन सचिव की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की समिति ने न्यायमूर्ति एस जे कथावाला और न्यायमूर्ति एस पी तावड़े की खंडपीठ के समक्ष यह कहा।

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यह खंडपीठ एयर इंडिया के पायलट देवेन कनानी की याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में दावा किया गया है कि विमानन कंपनी फंसे हुए लोगों को भारत वापस लाने वाली उड़ानों में बीच वाली सीटें खाली नहीं रख रही है।

अदालत ने हवाई यात्रा के संबंध में जन स्वास्थ्य सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा करने के लिए गठित विशेषज्ञों की एक समिति से बृहस्पतिवार को पूछा था कि क्या कोरोना वायरस का संक्रमण छूने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है?

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समिति ने शुक्रवार को अदालत ने कहा कि संक्रमित व्यक्ति के छूने से केवल कुछ ही परिस्थितियों में कोरोना वायरस फैल सकता है। यह संक्रमण ऐसी परिस्थितियों में फैलता है, जैसे संक्रमित व्यक्ति के छींकने या खांसने के दौरान उसकी नाक या उसके मुंह से निकली बूंदें यदि किसी सतह या कपड़े के संपर्क में आती हैं और कोई अन्य व्यक्ति उस सतह या कपड़े को छूने के बाद अपनी नाक, आंख या मुंह को छूता है।

उसने कहा, ‘‘संक्रमित व्यक्ति के किसी दूसरे व्यक्ति को छू देने से संक्रमण नहीं फैलता है। वायरस वाली बूंदों के संपर्क में आने और फिर बूंदों के संपर्क में आए दूसरे व्यक्ति के मुंह, नाक या आंखों को छूने से यह फैलता है।’’

समिति ने कहा कि यदि यात्री विमानन कंपनी द्वारा मुहैया कराए गए सुरक्षात्मक उपकरण, मास्क और चेहरे को ढकने वाली शील्ड का उपयोग करते हैं तो इससे कोरोना वायरस संक्रमण फैलने का खतरा कम हो जाएगा।

अदालत ने इन दलीलों को सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।

पीठ ने कहा कि आदेश सुनाए जाने तक सभी विमानन कंपनियां नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा जारी 31 मई के परिपत्र का पालन करेंगी, जिसमें बीच की सीट खाली रखने की कोशिश करने और जिन यात्री को ये सीटें दी गई हैं, उन्हें पूरे शरीर को ढकने वाले गाउन मुहैया कराने का निर्देश दिया गया है।

याचिका में दावा किया गया है कि एअर इंडिया ने कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिये केंद्र द्वारा 23 मार्च को जारी परिपत्र में बताए गए दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया था।

एअर इंडिया ने पिछले हफ्ते अदालत को बताया था कि 23 मार्च के परिपत्र के बाद सरकार द्वारा 22 मई को एक नया परिपत्र जारी किया गया था जिसमें कहा गया था कि 25 मई से घरेलू उड़ानों का संचालन किया जा सकता है।

चंद्रचूड़ ने कहा कि नए परिपत्र में यह नहीं कहा गया है कि बीच की सीट को खाली रखने की जरूरत है।

अदालत ने हालांकि पिछले हफ्ते कहा था कि 25 मई का परिपत्र प्रथम दृष्टया घरेलू उड़ानों के लिये था न कि एअर इंडिया द्वारा संचालित वंदे भारत अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिये।

उच्च न्यायालय ने तब एअर इंडिया और डीजीसीए से अपना रुख स्पष्ट करने को कहा था।

इसके बाद एअर इंडिया ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया था। न्यायालय ने विमानन कंपनी को पांच जून तक अपनी बीच वाली सीट पर यात्रियों को बैठाए जाने के साथ उड़ान संचालित करने की अनुमति दी थी। उसने साथ ही कहा था कि सरकार को विमानन कंपनियों के स्वास्थ्य से अधिक चिंता नागरिकों के स्वास्थ्य की होनी चाहिए।

उच्च न्यायालय ने याचिका में अपना आदेश पारित किए जाने तक वंदे भारत उड़ानों के लिए बीच वाली सीट आरक्षित करने की एयर इंडिया को न्यायालय द्वारा दी गई राहत की अवधि शुक्रवार को बढ़ा दी।

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