देश की खबरें | मप्र के मुख्यमंत्री को नयी घोषणाएं करने से रोके जाने की गुहार वाली जनहित याचिका खारिज

इंदौर, पांच जुलाई मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें राज्य सरकार के खजाने की कथित बदहाली के मद्देनजर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को नयी घोषणाएं से रोके जाने के निर्देश दिए जाने गुहार की गई थी। याचिकाकर्ता के वकील ने बुधवार को यह जानकारी दी।

उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ के न्यायमूर्ति सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति हिरदेश ने बड़वानी जिले के सेंधवा कस्बे के कर सलाहकार बीएल जैन (68) की ओर से दायर जनहित याचिका दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 26 जून को खारिज कर दी।

जनहित याचिका ऐसे वक्त में दायर की गई थी, जब सूबे में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर सत्तारूढ़ भाजपा के साथ ही प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस की ओर से मतदाताओं के लिए नित लोक-लुभावन घोषणाएं की जा रही हैं।

जैन ने अपनी याचिका में एक हिन्दी दैनिक की खबर का हवाला देते हुये कहा था कि राज्य सरकार की माली हालत बेहद खराब है और इसके बावजूद वह 4,000 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने जा रही है।

पीठ ने पुरानी नजीरों का हवाला देते हुए कहा कि यह बात कानूनी रूप से स्थापित है कि समाचार पत्रों की खबरों के बूते दायर जनहित याचिका पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

अदालत ने कहा कि वह इस याचिका को मंजूरी देने की कोई वजह नहीं देखती और यह याचिका खारिज कर दिए जाने के योग्य है। पीठ ने हालांकि कहा कि याचिकाकर्ता चाहे तो वह ऐसे ठोस दस्तावेजों के साथ दोबारा इस अदालत का रुख कर सकता है, जिनसे उसकी मूल जनहित याचिका में उठाए गए मुद्दे की पुष्टि होती हो।

जैन के अधिवक्ता अभिषेक तुगनावत ने "पीटीआई-" को बताया,"मेरे मुवक्किल अपनी जनहित याचिका को उच्च न्यायालय की खंडपीठ द्वारा खारिज किए जाने के बाद उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।"

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)