इंदौर, 20 जुलाई मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने उज्जैन के "श्री महाकाल लोक" गलियारे में भ्रष्टाचार के कारण घटिया निर्माण किये जाने आरोप लगाते हुए प्रदेश कांग्रेस समिति के मीडिया विभाग के अध्यक्ष के के मिश्रा द्वारा दायर की गयी जनहित याचिका खारिज कर दी है। याचिकाकर्ता के वकील ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
मिश्रा ने याचिका दायर कर आरोप लगाए थे कि गलियारे के निर्माण में भ्रष्टाचार करके सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया गया, घटिया निर्माण के कारण मानव जीवन खतरे में पड़ गया और इन गड़बड़ियों से हिंदुओं की भावनाएं आहत हुईं।
याचिका में गुहार लगायी गयी थी कि उक्त आरोपों को लेकर मध्य प्रदेश सरकार के संबंधित अधिकारियों और संबंधित कंपनियों के मालिकों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए और कथित घटिया निर्माण से सरकारी खजाने को हुए नुकसान की भरपाई इन्हीं प्रतिवादियों से की जाए।
उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ के न्यायमूर्ति सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति हिरदेश की पीठ ने सभी संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 14 जुलाई को यह याचिका खारिज कर दी।
युगल पीठ ने कहा कि अदालत को बताया गया है कि श्री महाकाल लोक गलियारे के निर्माण में कथित गड़बड़ियों का स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य के लोकायुक्त ने जांच शुरू कर दी है।
अदालत ने यह भी कहा कि याचिका दायर करते वक्त 2008 के मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय नियमों का पालन नहीं किया गया है। युगल पीठ ने कहा कि इन नियमों का पालन नहीं किए जाने और लोकायुक्त के सामने महाकाल लोक गलियारा मामले की जांच रिपोर्ट लंबित होने के कारण अदालत जनहित याचिका खारिज करती है।
महाकाल लोक गलियारे की छह प्रतिमाएं 28 मई को आई तेज आंधी के चलते गिरकर टूट गई थीं। करीब 11 फुट ऊंची ये टूटी प्रतिमाएं वहां स्थापित सप्त ऋषियों में से छह ऋषियों की थीं। इसके बाद एक जून को इस गलियारे के नंदी द्वार का कलश टूट कर गिर गया था जिससे फर्श को भी नुकसान पहुंचा था।
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