देश की खबरें | डिजिटल जगत में मानवाधिकार के रूप में निजता की सुरक्षा आवश्यक : एनएचआरसी प्रमुख

नयी दिल्ली, 19 फरवरी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) वी रामसुब्रमण्यन ने इस बात पर जोर दिया है कि डिजिटल जगत में ‘‘मानवाधिकार के रूप में निजता’’ की सुरक्षा आवश्यक है।

उन्होंने यह भी कहा कि मानवीय मूल्यों में ‘‘काफी गिरावट’’ आई है और इसके परिणाम भुगतने होंगे।

आयोग द्वारा बुधवार को जारी एक बयान के अनुसार, एनएचआरसी प्रमुख ने इसके परिसर में आयोजित ‘डिजिटल युग में गोपनीयता और मानवाधिकार सुनिश्चित करना: कॉरपोरेट डिजिटल जिम्मेदारी पर ध्यान’ विषय पर एक खुली चर्चा के दौरान यह टिप्पणी की।

चर्चा में जो महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए, उनमें शामिल हैं -- उपभोक्ता की समझ और व्यक्तिगत डेटा पर नियंत्रण बढ़ाने के लिए उपयोगकर्ता समझौतों और नीतिगत ढांचे को सरल बनाना, विशेष रूप से अनुसंधान संस्थानों और तीसरे पक्ष के डेटा प्रोसेसर के लिए ‘‘स्पष्ट जवाबदेही’’ तय करना तथा अधिक पारदर्शिता के लिए उपयोगकर्ता सहमति ढांचे को मजबूत करना।

बयान के अनुसार, अनुपालन न करने पर स्पष्ट दंडात्मक प्रावधान’’ करने, डेटा साझाकरण संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए अन्य देशों के साथ द्विपक्षीय समझौतों की आवश्यकता, सख्त डेटा स्थानीयकरण अनिवार्यताओं से उत्पन्न चुनौतियों का समाधान करने तथा नाबालिगों से जुड़े सत्यापन के लिए माता-पिता की सहमति प्राप्त करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करने का भी सुझाव दिया गया है।

बयान में कहा गया है कि प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए एनएचआरसी अध्यक्ष ने ‘‘इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल दुनिया में निजता को मानवाधिकार के रूप में सुरक्षित रखना आवश्यक है।’’

इसमें कहा गया है कि प्रौद्योगिकीय प्रगति के साथ-साथ मौलिक मानवाधिकारों और निजता की सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

कई प्रतिभागियों ने वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा उपयोगकर्ता डेटा पर लगाए गए व्यापक नियंत्रण पर चिंता जताई।

बयान में कहा गया है कि इसके अलावा, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ती निर्भरता व्यक्ति की निजता को बनाए रखना अधिक चुनौतीपूर्ण बनाती है।

प्रतिभागियों ने कहा कि उपभोक्ताओं के पास डेटा संग्रह के लिए सहमति देने के सीमित विकल्प हैं, क्योंकि कई व्यावसायिक मॉडल ने डेटा साझा करने को अनिवार्य किया हुआ है।

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