नयी दिल्ली, चार दिसंबर दक्षिण दिल्ली के सैनिक फार्म क्षेत्र में तेंदुआ देखे जाने की हालिया खबरों के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को वन विभाग से कहा कि वह इस महीने वन्य जीव अभयारण्य के नजदीक होने वाले ‘वॉक विद वाइल्डलाइफ’ कार्यक्रम आयोजित करने की अपनी योजना पर आगे नहीं बढ़े क्योंकि वह लोगों को खतरे में नहीं डाल सकता।
योजना को ‘मजाक’ करार देते हुए न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने विभाग से दक्षिणी रिज में असोला भट्टी वन्यजीव अभयारण्य में तेंदुओं की संख्या और स्थान के बारे में सवाल किया, साथ ही पूछा कि क्या सैनिक फार्म में भटककर आए तेंदुए को पकड़ लिया गया है।
सुनवाई के दौरान मौजूद वन विभाग के अधिकारी ने कहा कि इस कार्यक्रम के लिए निगरानी पथ पर केवल सीमित संख्या में लोगों को अनुमति दी जाएगी जबकि पहले ‘वॉकथॉन’, ‘हाफ मैराथन’ और ‘जंगल ऑन व्हील्स’ कार्यक्रम का हिस्सा था।
इस पर न्यायमूर्ति सिंह ने कहा, ‘‘ आप गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं। वहां 100 लोग हैं (जिन्हें कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति है। अभयारण्य में कितने तेंदुए हैं? ... क्या आपने उस तेंदुए को सैनिक फार्म में पकड़ा है? यह एक मजाक है?’’
उन्होंने कहा, ‘‘ आप इस तरह की स्थिति को संभालने के लिए तैयार नहीं हैं। मैं लोगों को इस तरह के जोखिम में नहीं पड़ने दे सकता।’’
न्याय मित्र अधिवक्ता गौतम नारायण और आदित्य एन प्रसाद ने अदालत को बताया कि उस स्थान के संबंध में कोई स्पष्टता नहीं है।
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