देश की खबरें | निजी प्रयोगशालाओं का मौके पर जाकर नमूने एकत्र करने से इंकार करना स्वीकार्य नहीं : उच्च न्यायालय
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि जब कोविड-19 के मामले रोजाना बढ़ रहे हैं, ऐसे ''नाजुक मोड़'' पर निजी प्रयोशालाओं का मौके पर जाकर नमूने एकत्र अथवा जांच करने से इंकार करना ''स्वीकार्य नहीं'' था।
नई दिल्ली, दो जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि जब कोविड-19 के मामले रोजाना बढ़ रहे हैं, ऐसे ''नाजुक मोड़'' पर निजी प्रयोशालाओं का मौके पर जाकर नमूने एकत्र अथवा जांच करने से इंकार करना ''स्वीकार्य नहीं'' था।
न्यायाधीश हिमा कोहली और सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने कहा कि यदि मौके पर जाकर नमूने एकत्र करने अथवा जांच करने के लिए तय की गयी दर से प्रयोगशालाएं खुश नहीं हैं तो वे इस मुद्दे को दिल्ली सरकार अथवा उप राज्यपाल की ओर से गठित समिति के समक्ष उठा सकते हैं।
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पीठ ने कहा, '' हालांकि, यह स्वीकार्य नहीं है कि ऐसे नाजुक मोड पर जब कोविड-19 संक्रमण के मामले दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे हैं निजी प्रयोशालाएं मौके पर जाकर जांच करने से इंकार करें।''
राष्ट्रीय राजधानी में जांच की संख्या बढ़ाने और तेजी से नतीजे प्राप्त करने को लेकर वकील राकेश मल्होत्रा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान पीठ ने यह टिप्पणी की।
इस मामले में, दिल्ली सरकार की ओर से अतिरिक्त स्थायी वकील सत्यकाम ने शपथपत्र दाखिल किया, जिसमें कहा गया कि इसने उप राज्यपाल द्वारा गठित समिति की सिफारिशों को लागू करने के लिए अदालत के 25 जून के निर्देश का अनुपालन किया है।
इसके अलावा, सत्यकाम ने नमूनों की जांच में बढ़ोत्तरी एवं त्वरित नतीजों के बाबत सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों की भी अदालत को जानकारी दी।
वहीं, अदालत ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) को भी शपथपथ दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया कि कितनी निजी प्रयोगशालाओं एवं अस्पतालों ने आरएडीटी जांच करने के लिए अधिकृत करने के संबंध में उससे संपर्क किया।
साथ ही दैनिक आधार पर दिल्लीवासियों के लिए किए गए परीक्षणों की वास्तविक संख्या को स्पष्ट करने का भी निर्देश दिया।
मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई के लिए सूचीबद्ध की गई।
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