देश की खबरें | प्रधानमंत्री की पहल से बिहार में ‘नीली और श्वेत क्रांति’ की गति होगी तेज: सुशील

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बृहस्पतिवार को राज्य के सात जिलों में 294 करोड़ रूपये की लागत से ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ (पीएमएमएसवाई) सहित मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं का बृहस्पतिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन एवं शिलान्यास किये जाने पर कहा कि इस पहल से राज्य में एक साथ ‘नीली व श्वेत क्रांति’ की गति तेज होने के साथ करोड़ों किसानों की आमदनी दोगुनी होगी।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

पटना, 10 सितंबर बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बृहस्पतिवार को राज्य के सात जिलों में 294 करोड़ रूपये की लागत से ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ (पीएमएमएसवाई) सहित मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं का बृहस्पतिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन एवं शिलान्यास किये जाने पर कहा कि इस पहल से राज्य में एक साथ ‘नीली व श्वेत क्रांति’ की गति तेज होने के साथ करोड़ों किसानों की आमदनी दोगुनी होगी।

सुशील कुमार मोदी ने इस आनलाइन कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि योजनाओं में से कुछ को उसी विभाग द्वारा क्रियान्वित किया जाएगा जो पशुपालन घोटाले के लिए चर्चा में आया था।

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उल्लेखनीय है कि पशुपालन विभाग का नाम अब पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग हो गया है।

सुशील कुमार मोदी ने कहा, ‘‘यह वही विभाग है जो कभी पूरी दुनिया में पशुपालन घोटाले के लिए चर्चित हुआ था। कोई इस विभाग का मंत्री बनना नहीं चाहता था। 2005-06 में इस विभाग का बजट जहां मात्र 72 करोड़ रुपये था। वहीं 2019-20 में यह 16 गुना बढ़ कर 1178 करोड़ रुपये हो गया है। बिहार में बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के साथ ही किशनगंज में फिशरी विज्ञान कॉलेज की स्थापना की गई है। वेटनरी की पढ़ाई करने वालों को 2-2 हजार रुपये की छात्रवृत्ति देने वाला बिहार देश का पहला राज्य है।’’

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उन्होंने कहा कि वर्ष 2007-08 में जहां 57 लाख मीट्रिक टन दूघ का उत्पादन होता था, वह 2019-20 में बढ़ कर 104 लाख मीट्रिक टन हो गया है। दूध की प्रोसेसिंग भी 8.45 लाख टन से बढ़ कर 33.55 लाख टन हो गई है। इसी अवधि में पशुओं का टीकाकरण 6.64 लाख से बढ़ कर 16.98 लाख हो गया है।

सुशील ने कहा कि कोरोना वायरस काल के चार महीने में बिहार राज्य दुग्ध सहकारी संघ लिमिटेड (कम्फेड) ने बिहार के किसानों से दूघ की खरीददारी करके उन्हें 800 करोड़ रूपये से ज्यादा का भुगतान किया है। पहले रायबरेली दूध भेजकर पावडर बनाया जाता था, मगर अब बिहार में प्रतिवर्ष 112 मीट्रिक टन दूध पावडर बनाने की क्षमता का प्लांट है।

उन्होंने कहा कि बिहार में 2007-08 की मात्र 2.88 लाख मीट्रिक टन की तुलना में 2019-20 में 6 लाख 42 हजार मीट्रिक टन मछली का उत्पादन होता है जिसमें से 33 हजार टन मछली नेपाल, सिलीगुड़ी, बनारस, गोरखपुर, अमृतसर आदि शहरों में भेजी जाती है। उन्होंने कहा कि बिहार के लोगों को यह भी जानकारी नहीं थी कि मछलियों को चारा भी खिलाया जाता है लेकिन आज यहां मछली चारा प्लांट का उद्घाटन हो रहा है।

इस कार्यक्रम में राज्यपाल फागू चौहान के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से भाग लिया।

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