जरुरी जानकारी | प्रधानमंत्री ने बैंकों, एनबीएफसी प्रमुखों के साथ बैठक की
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नयी दिल्ली, 29 जुलाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को बैंक के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की और कोविड-19 महामारी से प्रभावित अर्थव्यवस्था के पुनरूद्धार के लिये उत्पादक क्षेत्रों को कर्ज दिये जाने की आवश्यकता पर बल दिया।
वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिये करीब तीन घंटे चली बैठक में सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े बैंकों के मुख्य कार्यपालक अधिकारी और गैर-बैंकिग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के प्रमुख शामिल हुए।
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सूत्रों के अनुसार बैठक के दौरान आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य हासिल करने में वित्तीय क्षेत्र के महत्व को रेखांकित किया गया।
सूत्रों ने कहा कि प्रधानमंत्री ने लक्ष्यों को हासिल करने में सरकार की तरफ से वित्तीय क्षेत्र को हर प्रकार के समर्थन का आश्वासन दिया।
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बैठक के एजेंडे में ऋण उत्पाद और डिलिवरी के दक्ष मॉडल, प्रौद्योगिकी के जरिये वित्तीय सशक्तिकरण और वित्तीय क्षेत्र के स्थायित्व एवं बाजार में टिके रहने के लिए विवेकपूर्ण तौर-तरीके शामिल थे।
सूत्रों के अनुसार बैठक में शामिल होने वालों में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन रजनीश कुमार, पंजाब नेशनल बैंक के प्रबंध निदेशक एस एस मल्लिकार्जुन राव, आईसीआईसीआई बैंक के प्रबंध निदेशक संदीप बख्शी, एचडीएफसी बैंक के प्रबंध निदेशक आदित्य पुरी और एचडीएफसी लि. की प्रबंध निदेशक रेणु सूद कर्नार्ड समेत अन्य शामिल हुए।
कोविड-19 संकट के कारण बैंक कर्ज में वृद्धि मई में घटकर 7 प्रतिशत पर आ गयी जो एक साल पहले इसी माह में 11.5 प्रतिशत थी। अनिश्चितता और कर्ज लेने वालों के साथ-साथ कर्जदाताओं की जोखिम लेने से बचने की मंशा के कारण ऋण में वृद्धि चालू वित्त वर्ष में हल्की रहने की संभावना है।
रिजर्व बैंक ने ऋण मांग बढ़ाने के लिये मानक ब्याज दर रेपो को ऐतिहासिक रूप से 4 प्रतिशत के न्यूनतम स्तर पर लाया है। हालांकि कंपनियां और खुदरा कर्ज लेने वाले ऋण लेने से अब भी बच रहे हैं।
कर्ज की मांग अधिक नहीं होने से बैंक अपना पैसा रिजर्व बैंक के पास रिवर्स रेपो के अंतर्गत जमा कर रहे हैं।
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