देश की खबरें | बुजुर्ग कलाकारों को बाहर निकलने और काम से रोकना भेदभाव है : उच्च न्यायालय
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मुंबई, 24 जुलाई बंबई उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार से शुक्रवार को पूछा कि अगर राज्य किसी वरिष्ठ नागरिक को उसकी दुकान खोलने और पूरे दिन वहां बैठने से नहीं रोक रहा है तो वह किस आधार पर 65 वर्ष से अधिक उम्र के कलाकारों को मौजूदा लॉकडाउन के बीच काम पर निकलने से रोक रहा है।
न्यायमूर्ति एस जे कथावाला और न्यायमूर्ति आर आई चागला की पीठ ने कहा कि शारीरिक रूप से स्वस्थ, 65 वर्ष से अधिक उम्र के कलाकारों को शूटिंग और इस तरह के कामों के लिए बाहर जाने से रोकने का राज्य का फैसला “भेदभाव” का मामला प्रतीत होता है।
पीठ ने राज्य सरकार को शनिवार तक एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि किस आधार पर इस तरह का प्रतिबंध लगाया गया है।
पीठ ने यह भी कहा कि राज्य को स्पष्ट करना होगा कि उसने ऐसी निषेधाज्ञा जारी करने के लिए क्या किसी तरह के ‘‘ आंकड़ा, सांख्यिकी या रिपोर्ट’’ को ध्यान में रखा है।
पीठ, 70 वर्षीय प्रमोद पांडे की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें महाराष्ट्र सरकार द्वारा 30 मई, 2020 को जारी दिशा-निर्देशों को चुनौती दी गई है।
इन दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि 65 वर्ष से अधिक वायु वाले किसी भी कास्ट या कैमरा दल के सदस्य को शूटिंग के दौरान फिल्म या टीवी सेट पर आने की अनुमति नहीं होगी।
अधिवक्ता अशोक सरोगी के माध्यम से दायर याचिका में पांडे ने कहा कि वह चार दशक से टीवी धारावाहिक और फिल्मों में छोटी भूमिकाएं निभा रहे हैं और उनके पास आय का कोई दूसरा स्रोत नहीं है।
उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि वह शारीरिक रूप से स्वस्थ हैं। इसके बावजूद राज्य उन्हें स्टूडियो तक जाने और शूटिंग में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दे रहा है।
शुक्रवार को, राज्य की वकील पूर्णिमा कंथारिया ने उच्च न्यायालय को बताया कि दिशा-निर्देश भेदभावपूर्ण नहीं हैं क्योंकि सभी वरिष्ठ नागरिकों को घर से निकलने की मनाही है सिवाय जरूरी सामान के लिए बाहर निकलने के।
उन्होंने कहा कि आयु सीमा पर राज्य के दिशा-निर्देश केंद्र सरकार के कई दिशा-निर्देशों पर आधारित हैं जो लॉकडाउन के पिछले कुछ महीनों के दौरान जारी किए गए।
हालांकि, पीठ ने पूछा कि क्या सभी वरिष्ठ नागरिकों को हर तरह के पेशेवर कार्य को फिर से शुरू करने से प्रतिबंधित किया गया है जिसके जवाब में राज्य सरकार ने कहा कि उसने ऐसा नहीं किया है।
अदालत ने पूछा, “अगर मैं 70 साल का व्यक्ति हूं जिसकी एक दुकान है तो क्या आप मुझे दुकान खोलने या वहां दिनभर बैठने से रोकेंगे?”
इसपर वकील कंथारिया ने कहा, “नहीं।”
पीठ ने पूछा, “तो फिर आप कलाकारों को क्यों रोक रहे हैं?”
इसने कहा, “आपने यह नियम और कहां लागू किया है? यह भेदभाव है।’’
इससे पिछले हफ्ते सुनवाई के दौरान, उच्च न्यायालय ने राज्य से पूछा था कि 65 से अधिक उम्र के शारीरिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति गरिमामय जीवन कैसे बिता पाएंगे अगर उन्हें बाहर निकलने और आजीविका हासिल करने की इजाजत ही नहीं दी जाएगी।
मामले में मदद के लिए शुक्रवार को अदालत ने वरिष्ठ वकील शरण जगतियानी को न्याय मित्र नियुक्त किया था।
मामले में अंतिम सुनवाई अब अगले सप्ताह होनी है।
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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 24, 2020 05:33 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

