देश की खबरें | राष्ट्रपति ने केरल लोकायुक्त विधेयक को मंजूरी दी

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तिरुवनंतपुरम, 29 फरवरी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्य विधानसभा द्वारा पारित केरल लोकायुक्त विधेयक को मंजूरी दे दी है लेकिन उन्होंने तीन विश्वविद्यालय कानून विधेयकों पर अपनी स्वीकृति अभी नहीं दी है।

राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने राष्ट्रपति को ये विधेयक उनकी स्वीकृति के लिए भेजे थे।

राजभवन ने बृहस्पतिवार को एक बयान में कहा कि राष्ट्रपति ने केरल विश्वविद्यालय कानून (संशोधन संख्या 2) विधेयक 2022 पर अभी अपनी स्वीकृति नहीं दी है।

बयान के अनुसार इसके अलावा विश्वविद्यालय कानून संशोधन विधेयक, 2022 और विश्वविद्यालय कानून संशोधन विधेयक, 2021 को भी राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिली है।

बयान में कहा गया है कि राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति को भेजे गए सात विधेयकों में से, ‘‘केवल एक विधेयक केरल लोकायुक्त संशोधन विधेयक, 2022’’ को सहमति दी गई है।

केरल विधानसभा ने 30 अगस्त, 2022 को लोकायुक्त (संशोधन) विधेयक पारित किया था। इस विधेयक के तहत भ्रष्टाचार विरोधी निगरानी संस्था की सिफारिशों और रिपोर्टों को लेकर कार्यपालिका को अपीलीय प्राधिकारी बनाने का प्रावधान किया गया है।

खान ने पिछले साल नवंबर में विवादास्पद विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक और केरल लोकायुक्त विधेयक सहित सात विधेयकों को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए आरक्षित रखा था।

केरल सरकार द्वारा कानून को मंजूरी देने में खान द्वारा अत्यधिक देरी का आरोप लगाते हुए उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर करने के बाद यह कदम उठाया गया था।

राजभवन का बयान राज्य के कानून मंत्री पी. राजीव की उस टिप्पणी के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि केरल लोकायुक्त संशोधन विधेयक 2022 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलना यह दर्शाता है कि इस मामले पर राज्यपाल का रुख गलत था।

राजीव ने कहा कि जब संसद में लोकपाल विधेयक पर चर्चा हो रही थी, तब निर्णय लिया गया था कि राज्यों के पास समान कानून बनाने का अधिकार है और इसलिए, जिस तरह से केरल लोकायुक्त में संशोधन किए गए, उसमें कुछ भी गलत नहीं था।

उन्होंने कहा कि जब राज्यपाल ने विधेयक के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा था, तो यह उन्हें पढ़कर सुनाया गया था और इसलिए, उन्हें उसी समय इस पर हस्ताक्षर कर देना चाहिए था।

मंत्री ने कहा, ‘‘इसे स्वीकृति के लिए राष्ट्रपति के पास भेजने की जरूरत नहीं थी। अब राष्ट्रपति की मंजूरी से संकेत मिलता है कि राज्यपाल का रुख गलत था।’’

दूसरी ओर, कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन संयुक्‍त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने कहा कि लोकायुक्त विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलना मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और संघ परिवार के बीच समझौते के साथ-साथ राज्य और केंद्र सरकारों के बीच करीबी रिश्ते का संकेत देती है।

राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता वी. डी. सतीशन ने कहा कि विधेयक को मंजूरी मिलने से राज्य में भ्रष्टाचार विरोधी व्यवस्था चरमरा गयी है।

विपक्ष ने केरल लोकायुक्त विधेयक के पारित होने को राज्य विधानसभा के इतिहास में ‘‘काला दिन’’ करार दिया।

दूसरी ओर, माकपा के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार ने दलील दी कि राज्य लोकायुक्त अधिनियम को केंद्र के लोकपाल अधिनियम के अनुरूप लाने के लिए संशोधन किया गया था।

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