ताजा खबरें | अनंतनाग-राजौरी में मतदान के लिए तैयारी पूरी
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों में सीमा पार से गोलाबारी के खतरे और आकस्मिक स्थितियों से निपटने के लिए ‘सैटेलाइट फोन’ और विशेष संदेशवाहकों की व्यवस्था के अलावा अनंतनाग-राजौरी निर्वाचन क्षेत्र में यह सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए है कि इस सीट पर शनिवार को होने वाले मतदान के दौरान किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं हो।
अनंतनाग/राजौरी, 24 मई कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों में सीमा पार से गोलाबारी के खतरे और आकस्मिक स्थितियों से निपटने के लिए ‘सैटेलाइट फोन’ और विशेष संदेशवाहकों की व्यवस्था के अलावा अनंतनाग-राजौरी निर्वाचन क्षेत्र में यह सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए है कि इस सीट पर शनिवार को होने वाले मतदान के दौरान किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं हो।
इस सीट से पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती चुनाव लड़ रही है। उन्होंने 2015 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से नाता तोड़ लिया था। इस चुनाव में उनके खिलाफ नेशनल कॉन्फ्रेंस के मियां अल्ताफ, अपनी पार्टी के जफर इकबाल खान मनहास और 17 अन्य उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। भाजपा मनहास का समर्थन कर रही है।
जम्मू-कश्मीर की पांच सीट में से इस आखिरी सीट पर मतदान शनिवार को ऐसे समय होगा जब हाल में चार आतंकवादी हमले हुए हैं। इन हमलों में भारतीय वायुसेना के एक जवान और भाजपा के एक पूर्व संरपच की जान चली गई है।
अधिकारियों ने बताया कि चुनाव की तैयारी के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही। स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग, कुलगाम एवं शोपियां और पीर पंजाल के दक्षिण में राजौरी और पुंछ जिलों के 18 विधानसभा क्षेत्रों में फैले निर्वाचन क्षेत्र में बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
निर्वाचन आयोग ने इस संसदीय क्षेत्र में 2,338 मतदान केंद्र बनाए हैं, जिनमें 18.36 लाख से अधिक मतदाता मताधिकार का इस्तेमाल करने के पात्र हैं। प्रत्येक मतदान केंद्र पर पीठासीन अधिकारी समेत चार चुनाव कर्मचारी तैनात रहेंगे। कुल मिलाकर 9,000 से अधिक मतदान कर्मचारी तैनात किए जा रहे हैं।
अधिकारियों ने बताया कि राजौरी और पुंछ में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास 19 सीमावर्ती मतदान केंद्रों पर सीमा पार से हो सकने वाली गोलाबारी से निपटने के लिए एक आकस्मिक योजना तैयार की गई है, हालांकि भारत और पाकिस्तान के बीच फरवरी 2021 में लागू हुए संघर्ष विराम समझौते को देखते हुए इसकी संभावना ना के बराबर है।
कुछ मतदान केंद्र ऐसे क्षेत्रों में हैं जहां मोबाइल फोन या एसएमएस के जरिए संवाद कर पाना मुश्किल है। ऐसे क्षेत्रों में ‘सैटेलाइट फोन’, ‘वायरलेस सेट’ और संकट की स्थिति में विशेष संदेशवाहक उपलब्ध कराने जैसी वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।
अनंतनाग-राजौरी सीट का मौजूदा स्वरूप 2022 में परिसीमन आयोग की सिफारिश के बाद आया जिसमें पुलवामा और शोपियां के कुछ हिस्सों को अलग कर दिया गया और राजौरी एवं पुंछ जिले के अधिकतर हिस्से को इस सीट के अंतर्गत लाया गया।
इस परिसीमन प्रक्रिया की कई नेताओं ने आलोचना की। डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी के गुलाम नबी आजाद सहित अन्य लोगों ने परिसीमन के दौरान अपनाई गई प्रणाली पर चिंता व्यक्त की और परिसीमन के दौरान भौगोलिक सुसंगतता पर विचार नहीं किए जाने का आरोप लगाया।
अनंतनाग सीट पर 2019 में सिर्फ 9.8 प्रतिशत मतदान हुआ था और इस बार भी यहां दलों की अपेक्षाकृत कम रैलियां हुईं।
अधिक मतदान प्रतिशत के लिए जाने जाने वाले पुंछ और राजौरी क्षेत्रों में व्यस्त चुनाव प्रचार देखा गया।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला, पीडीपी की महबूबा मुफ्ती और उनकी बेटी इल्तिजा मुफ्ती, ‘जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी’ के अल्ताफ बुखारी और आजाद जैसे राजनीतिक दिग्गजों ने यहां प्रचार किया।
अनंतनाग लोकसभा सीट के लिए सात मई को मतदान होना था लेकिन खराब मौसम और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), अपनी पार्टी और डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (डीपीएपी) सहित विभिन्न दलों के अनुरोध के बाद मतदान की तरीख बदलकर 25 मई कर दी गई।
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