विदेश की खबरें | पोम्पिओ ने आसियान देशों से चीन को ‘ खुद पर भारी नहीं पड़ने’ देने को कहा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. पोम्पिओ ने दक्षिणपूर्वी एशियाई राष्ट्रों के संगठन के वार्षिक सम्मेलन में अपने समकक्षों से बात की। संगठन के चार सदस्य - फिलीपीन, वियतनाम, मलेशिया और ब्रुनेई चीन के साथ लंबे समय से इस व्यस्ततम जलमार्ग को लेकर क्षेत्रीय संघर्ष में उलझे हुए हैं जिसके समूचे हिस्से पर बीजिंग अपना दावा करता है।
पोम्पिओ ने दक्षिणपूर्वी एशियाई राष्ट्रों के संगठन के वार्षिक सम्मेलन में अपने समकक्षों से बात की। संगठन के चार सदस्य - फिलीपीन, वियतनाम, मलेशिया और ब्रुनेई चीन के साथ लंबे समय से इस व्यस्ततम जलमार्ग को लेकर क्षेत्रीय संघर्ष में उलझे हुए हैं जिसके समूचे हिस्से पर बीजिंग अपना दावा करता है।
भले ही अमेरिका दक्षिण चीन सागर पर कोई दावा नहीं करता लेकिन ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में क्षेत्र में बीजिंग के सैन्य निर्माण के लिए जिम्मेदार चीनी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए थे। इस सैन्य निर्माण में हवाई क्षेत्र बनाना और प्रवाल भित्तियों (कोरल रीफ) के ऊपर बनाए गए द्वीपों पर रडार और मिसाइल केंद्र स्थापित करना शामिल है जिसके बाद इसे लेकर भय उत्पन्न हो गया है कि चीन अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्रों में नौवहन की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप कर सकता है।
यह भी पढ़े | बांग्लादेश: नेत्रोकोना जिले में गुमाई नदी में नाव पलटनें से 10 लोगों की हुई मौत, कई लापता.
पोम्पिओ ने 10 राष्ट्रों वाले संगठन के शीर्ष राजनयिकों से कहा, “मेरे विचार में आगे बढ़ते रहिए, बस बातें मत करिए कार्रवाई करिए।”
विदेश मंत्रालय की एक प्रवक्ता ने कहा कि उन्होंने विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया।
यह भी पढ़े | फ्रांस में COVID19 मामलों की दूसरी सबसे बड़ी दैनिक वृद्धि दर्ज, 8 हजार 577 नए मामले आए सामनें.
पोम्पिओ ने कहा, ‘‘चीनी कम्युनिस्ट पार्टी को हमपर और हमारे लोगों पर भारी नहीं पड़ने दें। आपमें आत्मविश्वास होना चाहिए और अमेरिका आपकी दोस्त की तरह मदद करने के लिए यहां है।”
उन्होंने कहा कि चीन आसियान चार्टर में निहित संप्रभुता, गुणवत्ता एवं क्षेत्रीय अखंडता के लोकतांत्रिक मूल्यों और सिद्धांतों का सम्मान नहीं करता है। उन्होंने उन चीनी कंपनियों को अमेरिका द्वारा काली सूची में डाले जाने का जिक्र किया जिन्होंने विवादित जलक्षेत्र में द्वीपों के निर्माण का काम किया है।
अमेरिका ने नौवहन और विमानों से गश्त की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए युदधपोतों एवं लड़ाकू विमानों की तैनाती की है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)