जम्मू कश्मीर में मूल निवास संबंधी नियमों पर राजनीतिक दलों का आरोप, केंद्र कर रहा जनसांख्यिकी बदलने की कोशिश
उन्होंने कहा कि यह सब ऐसे समय किया जा रहा है जब देश कोविड-19 महामारी से लड़ रहा है।
श्रीनगर/जम्मू, 19 मई नेशनल कॉन्फ्रेंस सहित जम्मू कश्मीर के कई राजनीतिक दलों ने मंगलवार को नए मूल निवास नियमों को वापस लेने की मांग की और कहा कि भाजपा नीत केंद्र सरकार केंद्रशासित क्षेत्र की जनसांख्यिकी को बदलने के लिए नए अध्यादेश ला रही है।
उन्होंने कहा कि यह सब ऐसे समय किया जा रहा है जब देश कोविड-19 महामारी से लड़ रहा है।
जम्मू कश्मीर प्रशासन ने कश्मीरी प्रवासियों और विस्थापित लोगों के लिए नए सिरे से पंजीकरण करने का फैसला किया है जिसका भाजपा और कश्मीरी पंडित समुदाय ने स्वागत किया।
यह फैसला उन वास्तविक लोगों के समावेशन के लिए मार्ग प्रशस्त करता है जो जम्मू कश्मीर से चले गए थे।
प्रशासन द्वारा जारी नए नियमों के तहत पश्चिमी पाकिस्तान से संबंध रखने वाले लोगों, वाल्मीकि समाज से जुड़े लोगों, बाहर के समुदायों में शादी करने वाली महिलाओं, गैर पंजीकृत कश्मीरी प्रवासियों और विस्थापित लोगों को जल्द ही अधिवास मिलेगा।
हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के मीरवाइज उमर फारूक के नेतृत्व वाले धड़े ने कहा कि वैश्विक महामारी के कठिन समय में भारत सरकार जम्मू कश्मीर की जनसांख्यिकी में बदलाव करने और इसके निवासियों को अल्पसंख्यक बनाने के लिए चुपचाप नए अध्यादेश ला रही है।
माकपा की जम्मू कश्मीर इकाई ने भी नए मूल निवास नियमों को लेकर केंद्र की आलोचना की। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने नए नियमों को तत्काल वापस लेने की मांग की और कहा कि वह जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (राज्य के कानूनों के संयोजन) आदेश 2020 तथा मूल निवास प्रमाणपत्र प्रदायगी नियम 2020 का विरोध करती है।
भाजपा ने जम्मू कश्मीर के नए मूल निवास नियमों का स्वागत किया। पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि केंद्रशासित प्रदेश से बाहर रहे सभी शरणार्थियों और कश्मीरी पंडितों को नए नियमों से उनके अधिकार प्राप्त होंगे।
वहीं, ‘द ऑल पार्टीज माइग्रेंट्स को-ऑर्डिनेशन कमेटी’ ने नए नियमों का स्वागत किया और कहा कि कश्मीरी पंडित अब स्वयं को केंद्रशासित प्रदेश से जुड़ा महसूस कर रहे हैं और केंद्र सरकार ने उनकी भावनाओं का सम्मान किया है।
‘यूथ ऑल इंडिया कश्मीर समाज’ के अध्यक्ष आर के भट ने कहा कि भाजपा सरकार ने लोगों के कल्याण के लिए एक और कदम उठाया है।
जम्मू कश्मीर विचार मंच और रूट्स इन कश्मीर जैसे संगठनों ने भी केंद्र का आभार जताया।
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