देश की खबरें | नीति निर्माताओं को आपदा जोखिमों को कम करने और लचीलेपन के प्रति संवेदनशील होना होगा: रिजीजू

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने शुक्रवार को कहा कि नीति निर्माताओं को प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती बारंबारता और तीव्रता के मददेनजर आपदा जोखिम में कमी और लचीलेपन की जरूरत के प्रति संवेदनशील होना होगा ।

देहरादून, एक दिसंबर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने शुक्रवार को कहा कि नीति निर्माताओं को प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती बारंबारता और तीव्रता के मददेनजर आपदा जोखिम में कमी और लचीलेपन की जरूरत के प्रति संवेदनशील होना होगा ।

यहां छठे विश्व आपदा प्रबंधन कांग्रेस के समापन समारोह में भाग लेते हुए रिजिजू ने कहा, ‘‘अगर हम तैयार नहीं रहेंगे, तो एक आपदा भी सब कुछ तबाह कर सकती है और सभी विकास प्रयासों को बेअसर कर सकती है।’’

उन्होंने कहा,‘‘आपदाओं की बढ़ती बारंबारता और तीव्रता को ध्यान में रखते हुए नीति निर्माताओं को आपदा जोखिम में कमी लाने और लचीलेपन की आवश्यकता के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। हमारी नीतियों को इन चीजों को ध्यान में रखकर तैयार करने की जरूरत है ताकि चाहे रिक्टर पैमाने पर सात की तीव्रता का भी भूकंप आए, लोग सुरक्षित रहें ।’’

उत्तराखंड के सिलक्यारा में आंशिक रूप से अवरूद्ध निर्माणाधीन सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों को बाहर निकाले जाने के 'पेशेवर' तरीके की सराहना करते हुए रिजीजू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जिस प्रकार से आपदाओं से निपटा जा रहा है, वह मजबूत भारत के उदभव को दर्शाता है ।

यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर बन रही सुरंग का एक हिस्सा 12 नवंबर को ढह गया था जिससे उसमें काम कर रहे 41 श्रमिक मलबे के दूसरी ओर फंस गए थे । लगातार युद्धस्तर पर चलाए गए बचाव अभियान के 17 वें दिन 28 नवंबर को श्रमिकों को बाहर निकालने में सफलता मिली ।

केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न एजेंसियों और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के सामूहिक प्रयासों से सफल हुए बचाव अभियान के बारे में रिजीजू ने कहा कि यह एक सराहनीय और सफल अभियान था ।

उन्होंने कहा कि उन्होंने विश्व कांग्रेस में शामिल विशेषज्ञो के सुझावों और सिफारिशों पर आधारित 'देहरादून घोषणापत्र' को देखा है लेकिन ऐसे आयोजनों की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसका संदेश कितने प्रभावी तरीके से सामुदायिक स्तर पर ले जाया जाता है ।

रिजीजू ने कहा, ‘‘ऐसे आयोजनों का उददेश्य हर व्यक्ति को आपदा की स्थिति के लिए तैयार बनाना है ताकि उन्हें पता हो कि आपदा के 30 मिनट के भीतर खुद को सुरक्षित करने के लिए क्या करना है।’’

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