कोलकाता, 14 फरवरी एक विशेष धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत ने पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी को प्रभावशाली व्यक्ति करार देते हुए धनशोधन के एक मामले में मंगलवार को उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी।
चटर्जी के खिलाफ राज्य के सरकार-प्रायोजित एवं वित्त पोषित विद्यालयों में शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों की गैर-कानूनी नियुक्तियों के सिलसिले में धनशोधन का आरोप है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चटर्जी को उनकी कथित करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के आवास से भारी मात्रा में नकदी, आभूषण और अन्य दस्तावेजों की बरामदगी के बाद 23 जुलाई को गिरफ्तार किया था।
यह टिप्पणी करते हुए कि चटर्जी ‘सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में से एक’ हैं, विशेष अदालत के न्यायाधीश ने चटर्जी की जमानत अर्जी खारिज कर दी। वह पीएमएलए मामले में पिछले साल 23 जुलाई से हिरासत में हैं।
चटर्जी के वकील ने इस दलील के साथ अपने मुवक्किल की जमानत के लिए प्रार्थना की थी कि वह (चटर्जी) लंबे समय से हिरासत में हैं। वकील ने यह भी दावा किया कि तलाशी और जब्ती पूरी हो गई है।
हालांकि, ईडी के वकील फिरोज एडुल्जी ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि ईश्वर चंद्र विद्यासागर और पार्थ चटर्जी दोनों का जन्म बंगाल में हुआ था, लेकिन उनके बीच अंतर यह है कि जहां ईश्वर चंद्र विद्यासागर को राज्य में आधुनिक शिक्षा प्रणाली के विकास और उन्नति के लिए जाना जाता है, वहीं पार्थ चटर्जी को पश्चिम बंगाल की शिक्षा प्रणाली को ध्वस्त करने में उनकी भूमिका के लिए जाना जाएगा।
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