नयी दिल्ली, 19 जून दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी में 10,000 पेड़ लगाने और कई मामलों में चूककर्ता वादियों द्वारा जुर्माने के रूप में जमा कराई गई 70 लाख रुपये से अधिक की धनराशि का इसके लिए इस्तेमाल किए जाने का निर्देश दिया।
अदालत ने टिप्पणी की कि पेड़-पौधे वातावरण से कार्बन डाईऑक्साइड सोख कर हवा को शुद्ध बनाते हैं।
न्यायमूर्ति नजमी वजीरी ने कहा कि अदालत में जमा कराई जाने वाली इस राशि का इस्तेमाल व्यापक जनहित के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने चार वकीलों को अदालत के आयुक्तों के रूप में नियुक्त किया गया जो इस मुहिम के लिए स्थलों की पहचान करेंगे।
न्यायाधीश ने कहा कि पेड़ शहर और उसके निवासियों की कई पीढ़ियों को अपने जीवित रहने तक लाभ पहुंचाते रहते हैं। उन्होंने कहा कि पेड़ ‘पूरे साल शहर में व्याप्त रहने वाले’ प्रदूषण को न केवल अवशोषित कर हवा को शुद्ध करेंगे बल्कि वे उसकी सुंदरता भी बढ़ाएंगे।
अदालत ने अपने हालिया आदेश में कहा, ‘‘उप वन संरक्षक (डीसीएफ), जीएनसीटीडी (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार) के बैंक खाते में 70 लाख रुपये से अधिक स्थानांतरित किए जाएंगे... इस धनराशि का इस्तेमाल डीसीएफ, जीएनसीटीडी के पीडब्ल्यूडी (लोक निर्माण विभाग) की मदद से ऐसे इलाकों में पेड़ लगाने में करे, जिनकी पहचान शादान फरासत, आविष्कार सिंघवी, तुषार सन्नू, आदित्य एन प्रसाद करेंगे। वे सभी कम से कम 2,500-2,500 पेड़ लगाएंगे। अत: उन्हें अदालत के आयुक्त नियुक्त किया जाता है।’’
अदालत ने पुलिस को इस काम में डीसीएफ और अदालत आयुक्तों की मदद करने का निर्देश दिया।
उसने कहा कि वृक्षारोपण और पेड़ों के रखरखाव में सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और हर छह महीने में डीसीएफ से अभियान की स्थिति रिपोर्ट मांगी जानी चाहिए।
इस मामले में अगली सुनवाई सात जुलाई को होगी।
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