खेल की खबरें | प्रतिभाओं खोज के लिए महत्वपूर्ण जूनियर पैरा प्रतियोगिताओं की पहचान करने की योजना : दीपा मलिक
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Sports at LatestLY हिन्दी. भारतीय पैरालंपिक समिति (पीसीआई) की अध्यक्ष दीपा मलिक ने कहा कि रविवार को संपन्न हुए तोक्यो खेलों में अभूतपूर्व 19 पदक आने वाले वर्षों में पैरा खिलाड़ियों की प्रतिभा पहचान करने के लिए युवा कार्यक्रम पर अधिक जोर देने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
तोक्यो, पांच सितंबर भारतीय पैरालंपिक समिति (पीसीआई) की अध्यक्ष दीपा मलिक ने कहा कि रविवार को संपन्न हुए तोक्यो खेलों में अभूतपूर्व 19 पदक आने वाले वर्षों में पैरा खिलाड़ियों की प्रतिभा पहचान करने के लिए युवा कार्यक्रम पर अधिक जोर देने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
मलिक ने पीसीआई और ‘यूरोस्पोर्ट्स’ की ओर से आयोजित ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘ हम महत्वपूर्ण क्वालीफाइंग अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का चयन करने जा रहे है और बहरीन में होने वाला आगामी युवा एशियाई पैरा खेल उनमें से एक है। हमें भी अंडर -20, युवा खिलाड़ियों के साथ काम करना शुरू करना होगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ अगली पीढ़ी दम-खम दिखाने के लिए तैयार है । उन्हें प्रतिभा दिखाने का मौका देने के लिए हमें उन्हें मंच देना होगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें चिकित्सकीय रूप से वर्गीकृत करने के लिए अधिक से अधिक मौका देना होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो प्रतिभाएं आगे नहीं बढ़ेंगी।’’
उनका मानना है कि तोक्यो की सफलता के बाद सभी हितधारक एक साथ आएंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘ हम उम्मीद कर रहे हैं कि और अधिक हितधारक आगे आएंगे और हमारा हाथ थामेंगे। हम एक महासंघ के रूप में नयी प्रतिभाओं को बनाने, पहचानने और उनके साथ काम करने के लिए जिम्मेदार हैं। अब यही हमारा लक्ष्य है।’’
भारतीय दल की सफलता के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘ मुझे लगता है कि सभी कारकों के मिलने से यह संभव हुआ। जब तक आप में जागरूकता नहीं होगी, नयी प्रतिभा कहां आएगी। इस मामले में शायद 2016 में बदलाव आया, मीडिया की मदद मिली और इसके बाद सरकार और नीतियों के समर्थन से हमें एक ऐसा माहौल बनाने में मदद मिली जो पैरा-खेलों को स्वीकार कर रहा था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ और लोगों ने पैरा-खेलों को एक प्रतिष्ठित मंच के रूप में देखा। उनके पास यहां खुद को सशक्त बनाने और दिव्यांगता से परे अपनी क्षमताओं का निर्माण करने का मौका था।’’
रियो पैरालंपिक (2016) में रजत पदक जीतने वाली इस पूर्व खिलाड़ी कहा, ‘‘ जब लोगों इस मंच को स्वीकार करने लगे तो उन्होंने निश्चित रूप से अधिक ध्यान देना शुरू कर दिया है। इससे जुड़ी नीतियां अधिक समावेशी हो गयी है, हमें प्रधानमंत्री, खेल मंत्रालय, साइ (भारतीय खेल प्राधिकरण) का सीधा समर्थन मिला है। हमने खुद को फिर से संगठित किया है।’’
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)