कोरोना मरीजों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए जनहित याचिका दायर
जनहित याचिका में कहा गया है कि कोरोना वायरस फैलने की आशंका को लेकर स्थानीय लोगों द्वारा इस बीमारी के मरीजों के अंतिम संस्कार का विरोध किए जाने की खबरें सामने आयी हैं।
चेन्नई, 20 अप्रैल स्थानीय लोगों द्वारा कोरोना वायरस मरीजों के अंतिम संस्कार का विरोध किए जाने की घटनाओं का हवाला देते हुए सोमवार को उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गयी जिसमें अनुरोध किया गया है कि ऐसे अमानवीय कृत्य में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त गुंडा कानून के प्रावधानों लागू किए जाएं।
जनहित याचिका में कहा गया है कि कोरोना वायरस फैलने की आशंका को लेकर स्थानीय लोगों द्वारा इस बीमारी के मरीजों के अंतिम संस्कार का विरोध किए जाने की खबरें सामने आयी हैं।
याचिकाकर्ता और वकील ए पी सूर्यप्रकाशम ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सम्मानजक अंतिम संस्कार इस देश के प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है और इसका विरोध नहीं किया जा सकता।
जनहित याचिका पर इसी सप्ताह सुनवाई होने की संभावना है।
याचिका में रविवार की उस घटना का भी जिक्र किया गया है जिसमें रविवार को एक न्यूरोलॉजिस्ट के अंतिम संस्कार का विरोध किया था। न्यूरोलॉजिस्ट की कोरोना वायरस से संक्रमण के कारण मौत हो गयी थी।
जिस एम्बुलेंस में उनका शव ले जाया गया था, उस पर भी हमला किया गया था।
इस मार्मिक घटना में एक ऑर्थोपेडिक सर्जन ने अस्पताल के दो कर्मचारियों की मदद से आधी रात में अपने सहयोगी को दफनाया।
स्थानीय लोगों ने एम्बुलेंस पर हमला किया और उन्होंने ताबूत को भी नहीं बख्शा। लोगों ने ईंटों, पत्थरों, बोतलों और लाठियों से हमला किया।
पुलिस के अनुसार कि इस घटना में दो एम्बुलेंस चालकों सहित सात लोगों के साथ मारपीट की गई जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
सूत्रों ने कहा कि 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ के प्रदीप कुमार ने पीटीआई से कहा कि ऐसा किसी के साथ भी नहीं होना चाहिए चाहे वह डॉक्टर हों या आम आदमी।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, लेटेस्टली स्टाफ ने इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया है)