जरुरी जानकारी | पीएफसी, आरईसी कोष जुटाने के सस्ते विकल्प तलाशें : आर के सिंह

नयी दिल्ली, छह अक्टूबर बिजली मंत्री आर के सिंह ने सार्वजनिक क्षेत्र की पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) और आरईसी से कोष जुटाने को लेकर विदेशी स्रोत समेत सस्ते विकल्प तलाशने को कहा है।

उन्होंने दोनों गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) से यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि बिजली क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न इकाइयों खासकर नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को सस्ता कोष मिले।

बिजली मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘बिजली, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह ने 4 और 5 अक्टूबर, 2021 को क्रमश: आरईसी और पीएफसी लिमिटेड के कामकाज की समीक्षा के लिए बैठक की। उन्होंने दोनों इकाइयों से कोष की लागत को कम करने का प्रयास करने को कहा।’’

बैठक में बिजली राज्यमंत्री कृष्णपाल, बिजली सचिव और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ आरईसी और पीएफसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक उपस्थित थे।

बयान के अनुसार मंत्री ने सभी को 24 घंटे सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के बारे में सरकार के दृष्टिकोण का जिक्र किया। इस संदर्भ में उन्होंने दोनों संस्थानों की बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के दृष्टिकोण से इनकी प्रतिस्पर्धा में सुधार लाने की जरूरत पर जोर दिया।

उन्होंने यह भी सलाह दी कि दोनों संगठनों को बाजार की बदलती हुई जरूरतों के अनुसार गतिशील रुख अपनाना चाहिए, नवीकरणीय ऊर्जा में बढ़ोतरी करनी चाहिए और अपने कोष की लागत कम करने के प्रयास करने चाहिए।

इस संदर्भ में उन्होंने पीएफसी और आरईसी को विदेशी स्रोतों सहित कोष जुटाने के लिए बेहतर और सस्ते विकल्प तलाशने का सुझाव दिया ताकि बिजली क्षेत्र से जुड़ी सभी इकाइयों को सस्ती दर पर निधि उपलब्ध हो सके।

सिंह ने इसके लिये पीएफसी और आरईसी को उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर बिजली उपलब्ध कराने के उद्देश्य के साथ इस क्षेत्र में बदले हुए व्यापारिक माहौल के अनुकूल एक रणनीतिक विश्लेषण करने का भी निर्देश दिया।

उन्होंने दबाव वाली परिसंपत्तियों के जल्दी समाधान की जरूरत पर जोर दिया और इस संदर्भ में दोनों संगठनों को कई उपाय करने का सुझाव दिया। इसमें यह सुनिश्चित करना भी शामिल है कि दबाव वाली परिसंपत्तियों का न्यूनतम कटौती के साथ उचित मूल्य पर राष्ट्रीय हितों के अनुरूप समाधान किया जाए।

मंत्री ने यह निर्देश भी दिया कि पीएफसी और आरईसी द्वारा वित्तपोषित परियोजना पर निगरानी की कड़ी व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने दोनों संस्थानों के जोखिम प्रबंधन ढांचे को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया।

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