देश की खबरें | हिरासत में मौत और यातनाओं पर अंकुश के लिये दिशा निर्देश बनाने के बारे में न्यायालय में याचिका

नयी दिल्ली, आठ जुलाई पुलिस हिरासत में यातनायें, मौत और बलात्कार जैसी घटनाओं पर अंकुश के लिये कानूनी खामियों को दूर करते हुये दिशा निर्देश तैयार करने के लिये उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गयी है ताकि संविधान में प्रदत्त जीने और मानवीय गरिमा के अधिकार को सुरक्षित किया जा सके।

तमिलनाडु के तूतीकोरिन में पिछले महीने पुलिस हिरासत में पिता पुत्र की मृत्यु होने जैसे मामलों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर यह याचिका काफी महत्वपूर्ण है।

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यह याचिका एक गैर सरकारी संगठन ने दायर की है जिस पर आने वाले दिनों में विचार होने की संभावना है।

इस घटना में जयराज और उनके 31 वर्षीय पुत्र बेनिक्स को पुलिस ने 19 जून को सिर्फ इसलिए पकड़ लिया था कि उन्होंने लॉकडाउन के दौरान मोबाइल फोन के सामान बेचने वाली अपनी दुकान देर तक खोल रखी थी। पुलिस हिरासत के दौरान पिता पुत्र के शरीर पर अनेक जख्म हुये और इस वजह से बाद में दोनों की मृत्यु हो गयी थी।

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याचिका में केन्द्र को विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के सदस्यों को शामिल एक स्वतंत्र समिति गठित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है जिसकी निगरानी उच्चतम न्यायालय करे।

याचिका में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की 2017-18 की वार्षिक रिपोर्ट का हवाला देते हुये दावा किया गया है कि आयोग को इस दौरान न्यायिक हिरासत में 1,636 और पुलिस हिरासत में 148 व्यक्तियों की मृत्यु के बारे में सूचनायें मिली थीं।

अनूप

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