देश की खबरें | वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बच्चों के बयान दर्ज करने संबंधी याचिका: दिल्ली सरकार से जवाब तलब

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने बाल श्रम से बचाए गए बच्चों को कोविड-19 वैश्विक महामारी के मद्देनजर अदालत में ले जाने के बजाए वीडियो-कॉन्फ्रेंस के जरिए उनके बयान दर्ज करने का निर्देश देने संबंधी याचिका पर ‘आप’ सरकार और पुलिस से सोमवार को जवाब मांगा।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 20 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने बाल श्रम से बचाए गए बच्चों को कोविड-19 वैश्विक महामारी के मद्देनजर अदालत में ले जाने के बजाए वीडियो-कॉन्फ्रेंस के जरिए उनके बयान दर्ज करने का निर्देश देने संबंधी याचिका पर ‘आप’ सरकार और पुलिस से सोमवार को जवाब मांगा।

याचिका में अनुरोध किया गया है कि इन बच्चों को कोविड-19 संबंधी जांच के लिए सरकारी अस्पतालों में ले जाने के बजाए बाल देखभाल संस्थाओं या जहां उन्हें रखा गया है, उन घरों में या उपसंभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) के कार्यालय में ले जाना चाहिए।

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मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने दिल्ली सरकार और पुलिस को नोटिस जारी किया और उनसे 28 जुलाई तक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ की याचिका पर अपना रुख बताने को कहा।

वीडियो-कांफ्रेंस के जरिए सुनवाई के दौरान एनजीओ की वकील प्रभसहाय कौर ने अदालत से अपील की कि सुनवाई की आगामी तारीख तक दंडाधिकारी के सामने बच्चों के बयान दर्ज करने के लिए उन्हें अदालत नहीं लाया जाए।

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एनजीओ की इस चिंता को दिल्ली सरकार के वकील ने दूर कर दिया।

दिल्ली सरकार के वकील ने पीठ को बताया कि सुनवाई की आगामी तारीख तक किसी भी बच्चे को बयान दर्ज करने के लिए अदालत नहीं ले जाया जाएगा।

सरकारी वकील ने पीठ को बताया कि प्रशासन वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बयान दर्ज करने पर विचार कर रहा है और उसने बयान दर्ज कराने के लिए दंडाधिकारियों को बाल देखभाल संस्थाओं या घरों में भेजने का विकल्प भी सुझाया।

एसडीएम के कार्यालय या घर में कोविड-19 संबंधी जांच के बारे में सरकारी वकील ने कहा कि यह व्यवहार्य नहीं है और अस्पताल में सभी सावधानियां बरतने के बाद जांच की जाती है।

इसके बाद, पीठ ने दिल्ली सरकार और पुलिस को याचिका पर जवाब देने को कहा और मामले की आगे की सुनवाई के लिए 28 जुलाई की तारीख तय की।

एनजीओ ने अपनी याचिका में कहा कि उसने प्राधिकारियों के साथ मिलकर हाल में छापा मारा था और बाल श्रम से कई बच्चों को बचाया था।

इसके बाद, बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने पुलिस को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत दंडाधिकारी के सामने बच्चों का बयान दर्ज करने का निर्देश दिया था।

याचिका में कहा गया है कि सीडब्ल्यूसी और मामले के जांच अधिकारी कोविड-19 सबंधी चिंताओं के बावजूद इस बात पर जोर दे रहे हैं कि बच्चों को उनके बयान दर्ज कराने के लिए कड़कड़डूमा अदालत ले जाया जाए।

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