देश की खबरें | हाथरस की घटना में पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच के लिये पूर्व न्यायाधीश की न्यायालय में याचिका

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. एक सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी ने हाथरस जिले में कथित सामूहिक बलात्कार के बाद एक पखवाड़े तक जिंदगी के लिये संघर्ष करने वाली पीड़िता की मृत्यु की घटना के सिलसिले में पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच और उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिये सोमवार को उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर की।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, पांच अक्टूबर एक सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी ने हाथरस जिले में कथित सामूहिक बलात्कार के बाद एक पखवाड़े तक जिंदगी के लिये संघर्ष करने वाली पीड़िता की मृत्यु की घटना के सिलसिले में पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच और उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिये सोमवार को उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर की।

पूर्व न्यायिक अधिकारी चंद्र भान सिंह ने इस जनहित याचिका में पीड़ित के इलाज में राज्य प्रशासन और पुलिस पर मिलीभगत के आरोप लगाये हैं जिस वजह से उसकी मौत हो गयी। याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार से इतर किसी जांच एजेंसी से इस मामले की जांच कराने का अनुरोध किया गया है।

यह भी पढ़े | Rape in Gurugram: गुरुग्राम में 15 साल की नाबालिग लड़की के साथ पड़ोसी ने किया दुष्कर्म, मामला दर्ज.

हाथरस जिले के एक गांव में 14 सितंबर को 19 वर्षीय दलित लड़की से चार लड़कों ने कथित रूप से सामूहिक बलात्कार किया था। इस लड़की की बाद में 29 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मृत्यु हो गयी थी।

पीड़ित लड़की की 30 सितंबर की देर रात उसके घर के पास अंत्येष्टि कर दी गयी थी। उसके परिवार का आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने मृतक का अंतिम संस्कार जल्दी करने के लिये दबाव डाला था

यह भी पढ़े | Schools Reopening Guidelines Across India: 15 अक्‍टूबर से कैसे और किन शर्तों पर खुलेंगे स्‍कूल, यहां पढ़ें पूर्ण दिशानिर्देश.

हालांकि, स्थानीय पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परिवार की इच्छा के अनुसार ही उसकी अंत्येष्टि की गयी।

इस मामले के तूल पकड़ने के साथ ही उप्र सरकार ने सारे मामले की सीबीआई से जांच कराने की सिफारिश की है और ‘एफएसएल’ की रिपोर्ट का हवाला देते हुये बलात्कार के आरोप से इंकार किया है।

वकील स्मरहर सिंह के माध्यम से दायर याचिका में दलील दी गयी है कि इलेक्ट्रानिक मीडिया में सामने आये दृश्यों से पता चलता है कि पीड़ित की हड्डियां अब भी खुले खेत में पड़ी हैं और मीडिया, किसी बाहरी व्यक्ति या विधिनिर्माताओं के गांव में प्रवेश पर पूरी तरह पाबंदी लगी हुयी है।

याचिका में अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने पीड़िता की मां, पिता और भाई के बयान दर्ज कराने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

याचिका में कहा गया है कि अगर पीड़िता के परिवार के प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में व्यापक रूप से प्रकाशित और प्रसारित आरोप सही पाये जाते हैं तो प्रतिवादियों तथा इसमें संलिप्त पाये गये अन्य व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया जाये।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\