उल्लेखनीय है कि अमेरिका के मिनियेपोलिस शहर में एक काले व्यक्ति की मौत के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन के प्रति एकजुटता दिखाने के लिये दुनियाभर में प्रदर्शन हो रहा है और यह अमेरिका के बाहर भी नस्लीय भेदभाव को दर्शाता है।
पेरिस में अमेरिकी दूतावास के सामने लोगों ने कोरोना वायरस संबंधी पाबंदियों का उल्लंघन करते हुए प्रदर्शन किया। लेकिन दंगाविरोधी पुलिस ने उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया।
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लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर पर दोपहर को बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जुटे और वे गृह मंत्रालय की ओर बढ़े। ब्रिटिश सरकार ने लोगों से बड़ी संख्या में एकत्र नहीं होने की अपील की। पुलिस ने जनसभा को अवैध करार दिया।
सिडनी में रैली को अनधिकृत घोषित करने संबंधी शुक्रवार के फैसले के खिलाफ अपील पर प्रदर्शनकारियों को जीत मिली। न्यू साउथ वेल्स की एक अपीली अदालत ने रैली शुरू होने के 12 मिनट पहले उसे हरी झंडी दे दी। इस फैसले के आने से पहले ही टॉउन हॉल क्षेत्र में एक हजार से अधिक प्रदर्शनकारी एकत्र हो गये थे।
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अमेरिका के मिनियेपोलिस में 25 मई को एक अफ्रीकी-अमेरिकी जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या कर दी गई थी।
फ्लॉयड नाम के एक काले व्यक्ति की गर्दन पर श्वेत पुलिस अधिकारी द्वारा घुटना रखे जाने का वीडियो वायरल हुआ था।
सिडनी में, उस समय झड़प हुई जब पुलिस ने उस एक व्यक्ति को हटाया, जो इस प्रदर्शन के खिलाफ एक बैनर लेकर पहुंचा था और इस पर लिखा था, ‘‘व्हाइट लाइव्स, ब्लैक लाइव्स, ऑल लाइव्स मैटर।’’
क्वींसलैंड प्रांत की राजधानी ब्रिस्बेन में आयोजकों ने कहा कि लगभग तीस हजार लोग एकत्र हुए और पुलिस को कुछ प्रमुख सड़कों को बंद करना पड़ा।
दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में फ्लॉयड की मौत के विरोध में दूसरे दिन भी प्रदर्शनकारी एकत्र हुए।
फ्रांस की राजधानी पेरिस में पुलिस ने कोविड-19 फैलने के जोखिम और माहौल खराब होने की आशंका में शनिवार को निर्धारित विरोध प्रदर्शन पर रोक लगा दी।
एपी
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